सिद्धिदात्री वाक् साधना

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

Web ID: 998

`7
`9
Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

जीभ सबके मुख में है और बोलते भी सभी हैं पर बोलना किसी- किसी को ही आता है ।। वाणी का सही उपयोग कोई- कोई ही कर पाते हैं ।। तत्त्व- वेत्ताओं ने शब्द को शिव और वाणी को शक्ति कहा है ।। इनका अनुग्रह जिस पर हो, उसे अमृतत्व उपभोक्ता ही कहना चाहिए

शब्द- कंठ और जिह्वा का उच्चारण भर ही नहीं हैं- और न जीभ कैंची की तरह दिनभर चलाने एवं अनर्गल बकवास करने के लिए बनाई गई है ।। इसमें अजस्र शक्ति का भंडार भरा पड़ा है ।। यह उच्चारण अपने को तथा दूसरों को कितना प्रभावित करता है, इसका मर्म जो समझ लेते हैं, वे एक- एक शब्द को नाप- तोल कर बोलते हैं और अपनी निश्छलता एवं श्रद्धा का समावेश करके वाणी को इतना प्रभावशाली बना देते हैं कि सुनने वाला प्रभावित हुए बिना नहीं रहता ।।

Table of content

1. परम कल्याणी-मंगलमयी वाणी
2. वाणी का सदुपयोग सीखें
3. वाणी का व्यभिचार रोका जाए
4. वार्तालाप में शालीनता का समावेश रहे
5. शिष्टाचार का एक महत्त्वपूर्ण अंग वाक्-संयम
6. वाक्-कौशल व्यवहार-कुशलता का प्राथमिक चरण
7. अधिक न बोलना चाहिए


Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Edition 2015
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 48
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 05:31:PM
  • 26 Jan 2020




Write Your Review



Relative Products