आराम नहीं काम कीजिए

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

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Preface

उपनिषद्कार ने कहा है - "कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समा:।" कर्म करते हुए हम सौ वर्ष जीने की इच्छा करें ।। आराम करते हुए मौज- मजा करते हुए चैन की वंशी बजाते हुए सौ वर्ष जीने के लिए क्यों नहीं कहा उपनिषद् के ऋषि ने ? इसीलिए कि श्रम के अभाव में आराम, आनंद, यहाँ तक कि सौ वर्ष जीने का अधिकार भी छिन जाता है हम से ।। श्रम के साथ ही जीवन अपनी महानता और समृद्धियों के परदे खोलता है ।। जीवन की पूर्णता प्राप्त करनी है तो परिश्रम करना पड़ेगा ।।

स्वामी विवेकानंद ने कहा है- "श्रम ही जीवन है ।। जिस समाज में श्रम को महत्त्व नहीं मिलता वह जल्द ही नष्ट हो जाता है ।"

अमेरिका के धनकुबेर हेनरीफोर्ड ने लिखा है- "हमारा काम हमें जीने के साधन ही प्रदान नहीं करता वरन स्वयं जीवन प्रदान करता है ।"

Table of content

1. काम से जी न चुरावें
2. परिश्रमी बनिए- ऊँचे उठिए
3. श्रम से ही जीवन निखरता है
4. प्रगति का अमोघ साधन- श्रम
5. श्रम का सम्मान कीजिए
6. आराम नहीं काम कीजिए

Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Edition 2015
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 32
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 06:43:PM
  • 26 May 2020




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