संयुक्त परिवार के संयुक्त उत्तरदायित्व

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

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Preface

प्राचीन प्रणाली के संयुक्त परिवार एक दृष्टि से वर्तमान समय की सहयोग समितियों के प्रतीक थे ।। जैसे सौ व्यक्तियों का भोजन एक भोजनालय में बनाए जाने और सौ का अलग- अलग बनाने में परिश्रम तथा व्यय के परिमाण में बहुत भारी अंतर पड़ जाता है, वही अंतर दस- बीस व्यक्तियों के एक सम्मिलित परिवार और एक- एक पति- पत्नी के व्यक्तिगत परिवारों में है ।। इससे कोई इनकार कर ही नहीं सकता कि परिवार के साथ- साथ भाई- बंधु अपने बाल- बच्चों सहित एक परिवार में रहें, तो उनको कम खर्च में ऐसी सुविधाएँ प्राप्त हो सकती हैं, जो अकेले में कभी संभव नहीं हो सकती ।। इसमें यदि कभी बाधा पड़ती है तो उसका कारण लोगों की अनुचित या दूषित मनोवृत्ति ही होती है ।। यदि इसके सुधार का प्रयत्न कर लिया जाए तो सम्मिलित परिवार जीवन को सुखी बनाने में बड़ी दूर तक सहायक बन सकता है ।।

Table of content

1. संयुक्त परिवार थोपे नहीं बनाएँ
2. पारिवारिक स्नेह सम्बन्ध क्या टूट ही जायेंगे
3. परिवारिक दायित्वों का निर्वाह आवश्यक
4. परिवार और हमारे कर्तव्य
5. परिवार को एक इकाई मानकर चला जाए
6. परिवार में सहयोग एवं सद्भाव की आवश्यकता

Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Edition 2015
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 56
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 08:11:AM
  • 25 Jan 2020




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