भयमारक है- साहस पराक्रम संजीवनी

Author: Pt. Shriram Sharma Aacharya

Web ID: 980

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Preface

परमात्मा ने अनेक विभूतियों से सुसज्जित कर मनुष्य को इस धरती में भेजा है ।। जिन मंगलकारी उपहारों को लेकर वह इस वसुंधरा में अवतीर्ण होता है वे इतने हैं कि एक- एक की खोज और गणना करने बैठें तो अतुल श्रम व समय लगाना पड़े ।। भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जैसी बुद्धि व वाणी उसे मिली है, संसार के किसी अन्य जीव- जंतु को उपलब्ध नहीं ।। संसार की सारी मशीनें एक ही शरीर के सम्मुख हतप्रभ हैं ।। खाने- पीने, चलने- फिरने की स्वचालित मशीन और कोई भी नहीं जैसी मनुष्य को प्राप्त है ।। पारस्परिक प्रेम और स्नेह, त्याग और आत्मोत्सर्ग, सौहार्द, संगठन और सहानुभूति के बल पर वह चाहे तो इसी धरती पर स्वर्ग उतारकर रख दे ।। इनसे भी बढ़कर श्रेष्ठ व अनुपम वस्तु उसे मिली है ।। वह है आत्मिक बल की अनुपम संपदा ।। इसे प्राप्त कर मनुष्य सचमुच देवता बन जाता है ।।

Table of content

1.भयमारक है- साहस, पराक्रम संजीवनी
Author Pt. Shriram Sharma Aacharya
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 32
Dimensions 9 cm x 12 cm
  • 05:28:AM
  • 23 Jan 2020




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