व्यक्तित्व की पूर्णता

Author: Pt Shriram Sharma Acharya

Web ID: 978

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Preface

मनुष्य को मानवोचित ही नहीं देवोचित जीवन जी सकने योग्य साधन भी प्राप्त हैं ।। फिर भी उसे पशुतुल्य, दीन- हीन जीवन इसलिए जीना पड़ता है कि वह जीवन को परिपूर्ण, सुडौल बनाने के मूल तथ्यों पर न तो ध्यान ही देता है और न उनका अभ्यास करता है ।। जीवन को सही ढंग से जीने की कला जानना तथा कलात्मक ढंग से जीवन जीने को जीवन जीने की कला कहते हैं ।। इस प्रकार कलात्मक जीवन हुए मनुष्य लक्ष्य जीते जीवन के श्रेष्ठतम तक पहुँचने के लिए अनेक सद्गुणों का विकास करना होता है, अपने अंदर अनेक दोषों का शोधन तथा अनेक सद्गुण, सत्प्रवृत्तियों एवं क्षमताओं का विकास करना होता है ।। उन्हें विकसित और सुनियोजित करने की विद्या ही "जीवन साधना" कही जाती है ।। जीवन साधना द्वारा मनुष्य का व्यक्तित्व महामानवों, देव पुरुषों जैसा सक्षम एवं आकर्षक बनाया जाना संभव है ।।

Table of content

1.व्यक्तित्व की पूर्णता
Author Pt Shriram Sharma Acharya
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 32
Dimensions 9 cm x 12 cm
  • 03:58:PM
  • 15 Jul 2020




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