सत्कर्म, सद्ज्ञान और सद्भाव का संगम

Author: Pt. Shriram Sharma Aacharya

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Preface

संकल्प सक्रियता और साहस को जब सही दिशा में नियोजित किया जाता है तो वे सत्कर्म का आधार बनते हैं । इसीलिए जीवट, साहस, सक्रियता के साथ ही सद्भाव और सद्ज्ञान भी जरूरी है ताकि सही दिशा का चुनाव किया जा सके और निष्ठा पूर्वक उसी ओर बढ़ते रहा जाए । सत्कर्म, सद्ज्ञान और सद्भाव का संगम ही श्रेष्ठ जीवन की सुनिश्चित रीति-नीति है ।

Table of content

1. कर्मयोग और कर्म कौशल
2. योग: कर्मसु कौशलम
3. काम में लगन भी हो और भावना भी
4. कर्म पर भावना का प्रभाव

Author Pt. Shriram Sharma Aacharya
Edition 2013
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 56
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 05:55:PM
  • 26 May 2020




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