नारी श्रृंगारिकता नहीं पवित्रता है

Author: Mata Bhagwati Devi Sharma

Web ID: 906

`10 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

मनुष्य का वास्तविक सौन्दर्य उसके सुन्दर दृष्टिकोण में निहित है ।। बाहरी आँखें स्थूल दर्शन में सक्षम हैं जो सौन्दर्य का मूल्यांकन बाह्य रूप में आधार पर करती हैं ।। इसे शाश्वत सौन्दर्य नहीं कहा जा सकता ।। सौन्दर्य आत्मा का विषय है ।। आत्मा की सुषमा अक्षुण्ण चिरनूतन तथा प्रेम- परक होती है ।। प्रेम पारस की प्रतीक है जो असुन्दर को सुन्दर और कुरूप को रूपवान बना देता है ।। नारी के सौन्दर्य में विश्व की सुन्दरता समाहित है ।। नारी कोमलता, वात्सल्य, सेवा, सहिष्णुता एवं समर्पण रूपी दिव्य सौन्दर्य की प्रतिकृति है ।। सृजन नारी का दूसरा नाम है ।। श्रद्धा एवं शील में उसकी अलौकिक सुषमा छिपी होती है ।। अनंत वत्सला नारी कवीन्द्र- रवीन्द्र की दृष्टि में सृष्टि की सर्वोत्तम कृति है ।। सृष्टि में वात्सल्य, स्नेह, ममत्व, प्रेम की अमृत धाराएं नारी के हृदय से निकल कर इस संसार को अमृत दान कर रही हैं ।। कवि रस्किन नारी के आंतरिक सौष्ठव से परिचित है | वह कहता है- माता का हृदय एक स्नेहपूर्ण निर्झर है जो सृष्टि के आदि से अनवरत झरता हुआ मानवता का सिंचन कर रहा है ।' अभागा मनुष्य नारी के अनुदानों को विस्मृत कर उसे कामिनी और रमणी के रूप में देखना चाहता है ।। दया आती है उसकी इस कुरूप और विकृत दृष्टि पर ।।

दाम्पत्य जीवन में प्रवेशातुर युवक पीढ़ी अपनी आँखों के भ्रम की शिकार हो गई है ।। उसने समाज के सामने अपने दोषयुक्त चश्मे से एक विकट संकट उपस्थित कर दिया है, वह है, कट की रट ।। नासमझ यह नहीं जानते कि देहवष्टि और उसका रूप लावण्य स्थायी नहीं ।। दरअसल यह उसकी असली सुन्दरता नहीं है ।। असली सुन्दरता कभी नष्ट नहीं होती, जो इन चर्मचक्षुओं से परिलक्षित नहीं होती ।।

Table of content

1. नारी के सौन्दर्य का सच्चा स्वरूप
2. नारियाँ गुण सौन्दर्य बढ़ाएँ, आभूषण नहीं
3. शृंगारिकता के विकास से हानि पूरे समाज की
4. विज्ञापनो की अश्लीलता : मात्रसता का अपमान
5. गन्दी तस्वीरें/अश्लीलल पुस्तकें

Author Mata Bhagwati Devi Sharma
Edition 2015
Publication Yug Nirman Yojna Trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojna Trust
Page Length 56
Dimensions 12 X 18 cm
  • 09:37:PM
  • 5 Jun 2020




Write Your Review



Relative Products