क्रांति की रूप रेखा

Author: Shriram Sharma Aacharya

Web ID: 895

`18 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

हमें अपने विकास के लिए इस जीवन के माध्यम से ही, इसे रूपांतरित करके इसे बिल्कुल बदलकर प्रयत्न करना होगा । सामाजिक आदर्शवादी लोग आदर्श और वास्तविकता के बीच दो व्यवस्थाओं के संघर्ष में विश्वास करते हैं, जो सारे धर्मों का सार है । आवश्यक परिवर्तन और संघर्ष का यह क्रांतिकारी क्रम चलता ही रहता है ।

स्वयं परमात्मा एक सर्वोत्तम क्रांतिकारी है । वह सहा और पालनकर्ता के साथ विनाशकर्ता भी है । सृजन और विनाश की दैवी शक्ति के परस्पर आश्रित गुण हैं । यदि एक नई और अपेक्षाकृत अच्छी व्यवस्था खड़ी होनी हो तो पुरानी व्यवस्था को तोड़ डालना होगा । हम न केवल आध्यात्मिक जगत में अपितु राजनैतिक, सामाजिक, औद्योगिक जगत में भी ऐसी रूढ़ियों से घिरे हैं जो कभी जीवित थीं परंतु अब निर्जीव हो चुकी हैं । अब केवल शासक उपायों से काम नहीं चलेगा, इस समय आवश्यकता एक क्रांतिकारी परिवर्तन की आमूल- चूल उथल- पुथल की है ।

सब सुधार उन आंदोलनकारी, विद्रोही और क्रांतिकारी लोगों द्वारा किए गए हैं, जो पाखण्डों के जगत के विरुद्ध युद्ध करते रहे हैं । वे नए आंदोलन शुरू करते हैं, नए धर्म विज्ञान का प्रतिपादन करते हैं, नए संविधानों की नींव डालते हैं । धर्म इस महत्वपूर्ण कार्य को अपनी महान सामर्थ्य के द्वारा सदा से करता आया है ।


Table of content

1. धार्मिकता में क्रांति के सबल तत्त्व
2. युग निर्माण परिवार का पुनर्गठन
3. प्रगति के लिए संघर्ष और बलिदान का साहस रखें
4. महाक्रांति सुनिश्चित एवं अति निकट
5. क्रांति निज के अंतराल से आरंभ होगी
6. क्रांति का सही अर्थ समझें
7. आंदोलन की आवश्यकता एवं रूपरेखा
8. आस्तिकता संवर्धन
9. स्वास्थ्य संवर्धन आंदोलन
10. नारी जागरण आंदोलन
11. सत्प्रवृत्ति संवर्धन-दुष्प्रवृत्ति उन्मूलन आंदोलन
12. कुरीति उन्मूलन आंदोलन
13. व्यसन मुक्ति आंदोलन
14. विवाहोन्माद प्रतिरोध आंदोलन
15. परिजन, प्रामाणिकता सिद्ध करें


Author Shriram Sharma Aacharya
Edition 2007
Publication Yug Nirman Yojna Trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojna Trust
Page Length 96
Dimensions 12 X 18 cm
  • 06:57:AM
  • 20 Nov 2019




Write Your Review



Relative Products