युग परिवर्तन की पृष्ठभूमि रूपरेखा

Author: Shriram Sharma Aacharya

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Preface

आज की परिस्थितियों में सभी परिवर्तन चाहते हैं । अभावों के स्थान पर संपन्नता, अनिश्चितता के स्थान पर स्थिरता, आशंकाओं के स्थान पर आश्वासन अभीष्ट है । द्वेष का स्थान श्रद्धा को मिल-अविश्वास और आशंका की जड़ ही कट जयि । ऐसी मुखर परिस्थितियों की कल्पना करने भर से आँखें चमकने लगती हैं ।

उल्टे को उलटकर सीधा करें

सुविधा-साधनों की दृष्टि से हम पूर्वजों की तुलना में कही आगे हैं । विज्ञान और बुद्धिवाद की संयुक्त प्रगति ने अनेकानेक साधन ऐसे प्रस्तुत किये हैं, जिनकी सहायता से अपेक्षाकृत अधिक सुखी जीवन जी सकते है । पूर्वजों को शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन, संचार, यातायात, बिजली, तार, डाक, जहाज आदि अनेकों ऐसे सुविधा-साधन उपलब्ध नहीं थे, जैसे आज हैं । उन उपलब्धियों के आधार पर हमें अधिक सुखी होना चाहिए था, पर देखते हैं कि स्थिति और भी गई-गुजरी हो गई है । चिकित्सा और पौष्टिक खाद्यों की सुविधा वाले भी दिन-दिन दुर्बल और रुग्ण बनते जाते है । उच्च शिक्षित व्यक्ति भी संतुलन और विवेक से रहित चिंतन करते और विक्षुब्ध रहते देखे जाते हैं । गरीबों का उठाईगीरी करना समझ में आ सकता है, पर जो संपन्न है वे क्यों अन्याय-अपहरण की नीति अपनाते हैं, यह समझ सकना कठिन है ।

Table of content

१. उल्टे को उलटकर सीधा करें
२. नव निर्माण के लिए क्या करें ? कैसे करें ?
३. आधार-लोकशक्ति का जागरण
४. विचारक्राति के उपयुका साहित्य
५. लोकरंजन और लोकमंगल का समन्वय
६. श्रद्धा सद्भावना का संवर्धन-धर्मतंत्र के सहारे
७. नव निर्माण की पाँच प्रमुख संरचनाएँ

Author Shriram Sharma Aacharya
Edition 2012
Publication Yug Nirman Yojna Trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojna Trust,
Page Length 64
Dimensions 12 X 18 cm
  • 07:41:PM
  • 20 Nov 2019




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