सत्यनारायण व्रत प्रेरणा

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

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Preface

सत्यनारायण व्रत-कथा लोकप्रिय तो बहुत है, किंतु वर्तमान प्रचलित क्रम में उसका उपयोगी रूप लघुप्राय हो गया है । ऋषियों ने सत्यनारायण व्रत का प्रचार इस उद्देश्य से किया था कि लोग
भगवान को मनुष्य-रूप में नहीं भाव-रूप, सिद्धांत-रूप एवं शक्ति-रूप में समझें । सत्य ही नारायण है, यह भाव सत्यनारायण कथा से उभरता है । सत्य रूप में भगवान को मानकर उसकी आराधना ही सत्य-व्रत है ।

सत्यनारायण व्रत-कथा से सभी वर्गों को मार्गदर्शन दिया जा सकता है । समाज में चार शक्तियों प्रधान रूप से सक्रिय रहती हैं- १. ज्ञान, २. बल, ३. धन एवं ४. श्रम । इन सभी शक्तियों का विकास और सदुपयोग समाज की सुव्यवस्था के लिए आवश्यक है । इन्हीं शक्तियों से संपन्न व्यक्तियों को क्रमश : १. ब्राह्मण, २. क्षत्रिय, ३. वैश्य एवं ४. शूद्र कहा जाता था । इन शक्तियों को सत्य-परायण बनाकर कैसे सुख-समृद्धि पाई जाए यह मार्गदर्शन सत्य-व्रत कथा से मिलता है ।
इस दृष्टि से सत्यनारायण व्रत-कथा बहुत लोकोपयोगी है । लोकप्रिय कथा को लोकोपयोगी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके, तो समाज का उल्लेखनीय लाभ हो सकता है ।

Table of content

1.सत्यनारायण व्रत-कथा
Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Edition 2015
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistar Trust
Page Length 52
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 04:45:PM
  • 30 Nov 2020




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