अध्यात्मवाद ही क्यों ?

Author: Pt. shriram sharma

Web ID: 823

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Preface

यह तथ्य ध्यान में रखा जाना चाहिए कि मानवी सत्ता दो भागों में विभक्त है । एक भौतिक शरीर का पक्ष है और दूसरा आत्मिक चेतना का । भौतिक निर्वाह के लिए सुविधा-साधन चाहिए और आत्मिक संतोष के लिए आदर्शवादी वातावरण ।

यहाँ एक बात यह भी समझ लेने की है कि चेतना मुख्य है और कलेवर गौण । आत्मिक उच्चता रहते स्वल्प-साधनों में भी हँसते-हँसाते गौरवपूर्ण ऋषि जीवन जिया जा सकता है किंतु प्रचुर साधनों के होते हुए भी आंतरिक विकृतियाँ असुर स्तर के उद्वेग- अनाचारों का सृजन करती रहेंगी ।

Table of content

१.व्यक्तिगत संदर्भ में
२.सामाजिक संदर्भ में

Author Pt. shriram sharma
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 48
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 11:31:PM
  • 5 Jun 2020




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