विवाद से परे ईश्वर का अस्तित्व

Author: Pt. shriram sharma

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Preface

ईश्वर का अस्तित्व एक ऐसा विवादास्पद प्रश्न है, जिसके पक्ष और विपक्ष में एक से एक जोरदार तर्क-वितर्क दिये जा सकते है । तर्क से सिद्ध हो जाने पर न किसी का अस्तित्व प्रमाणित हो जाता है और सिद्ध न होने पर भी न कोई अस्तित्व अप्रमाणित बन जाता है । ईश्वर की सत्ता में विश्वास उसकी नियम व्यवस्था के प्रतिनिष्ठा और आदर्शों के प्रति आस्था में फलित होता है, उसी का नाम आस्तिकता है । यों कई लोग स्वयं को ईश्वर विश्वासी मानते बताते हैं, फिर भी उनमें आदर्शों व नैतिक मूल्यों के प्रति आस्था का अभाव होता है । ऐसी छद्म आस्तिकता के कारण ही ईश्वर के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लगता है । नास्तिकतावादी दर्शन द्वारा ईश्वर के अस्तित्व को मिथ्या सिद्ध करने के लिए जो तर्क दिये व सिद्धांत प्रतिपादित किये जाते है, वे इसी छद्म नास्तिकता पर आधारित है ।

आस्तिकवाद मात्र पूजा-उपासना की क्रिया-प्रक्रिया नहीं है, उसके पीछे एक प्रबल दर्शन भी जुड़ा हुआ है, जो मनुष्य की आकांक्षा, चिंतन-प्रक्रिया और कर्म-पद्धति को प्रभावित करता है । समाज, संस्कृति, चरित्र, संयम, सेवा पुण्य परमार्थ आदि सतवृत्तियों को अपनाने से व्यक्ति की भौतिक सुख-सुविधाओं में निश्चित रूप से कमी आती है, भले ही उस बचत का उपयोग लोक-कल्याण में कितनी ही अच्छाई के साथ क्यों न होता हो ? आदर्शवादिता के मार्ग पर चलते हुए, जो प्रत्यक्ष क्षति होती है उसकी पूर्ति ईश्वरवादी स्वर्ग, मुक्ति, ईश्वरीय प्रसन्नता आदि विश्वासों के आधार पर कर लेता है । इसी प्रकार अनैतिक कार्य करने के आकर्षण सामने आने पर वह ईश्वर के दंड से डरता है ।

Table of content

1. विवाद से परे ईश्वर का अस्तित्व
2. ईश्वरीय सत्ता के प्रमाण व विधान
3. अंतचेतना से उद्भूत सुव्यवस्था
4. भाव-संवेदनाओं में व्यक्त विश्वात्मा
5. सभी संतानों से समान प्यार
6. प्राणी जगत् की अतृप्त प्यास-प्रेम
7. सद्भाव संपन्नता विकसित चेतना का प्रमाण

Author Pt. shriram sharma
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 104
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 12:46:AM
  • 6 Jun 2020




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