असीम पर निर्भर ससीम जीवन

Author: Pt. shriram sharma

Web ID: 821

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Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

लहरों का पृथक् अस्तित्व दीखने पर भी वे वस्तुत: समुद्र की विशाल जलराशि की ही छोटी-छोटी इकाइयाँ होती है । किरणों का समन्वय ही सूर्य है । व्यक्तियों के समूह को समाज कहते हैं । सृष्टि के सबसे छोटे घटक अंड या अणु कहलाते हैं, इन्हीं का विशाल समुदाय ब्रह्मांड है । आत्माओं की सग्रिहक चेतना परमात्मा है । हम हवा के विशाल समुद्र में उसी प्रकार साँस लेते और जीते है, जिस प्रकार मछलियाँ किसी जलाशय में अपना निर्वाह करती हैं । प्राणियों की समग्र सत्ता बह्म है । अणुओं का समुदाय ब्रह्मांड, प्राणी और पदार्थों की सत्ता दीखती तो स्वतत्र है; पर वस्तुत: वह एक ही विशाल महाप्राण के अनंत संसार से अपना पोषण प्राप्त करते हैं, उसी में उगते, बढ़ते और बदलते रहते हैं ।

Table of content

• सृष्टि-संसार की नियामक सत्ता
• आस्तिक दर्शन के वैज्ञानिक आधार
• सब कुछ व्यवस्थित और नियमबद्ध है
• जन्म-मरण से कोई मुक्त नहीं
• जीवन का छोर कहीं है ?
• असीम पर निर्भर-ससीम जीवन
• आस्तिक बनें, ताकि सुखी रहें
Author Pt. shriram sharma
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 112
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 02:58:PM
  • 21 Oct 2020




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