पशुबलि-हिन्दू धर्म एवं विश्व मानवता पर एक कलंक

Author: Pt Shriram sharma acharya

Web ID: 756

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Preface

पशुवबलि हिंदू धर्म पर कलंक है

हिंदू धर्म का मूलभूत तत्त्वज्ञान इतना महान है कि उसके प्रत्येक सिद्धांत एवं विधान में विश्व कल्याण की, मानवता के चरम उत्थान की संभावनाएँ ही सन्निहित हैं ।। देवताओं और ऋषियों ने इस महान धर्म का ढाँचा इतने उच्च कोटि के आदर्शों द्वारा विनिर्मित किया है कि उसके व्यवहार का परिणाम स्वर्गीय वातावरण का निर्माण ही हो सकता है ।। परंतु दुख की बात है कि पिछले अज्ञानांधकार युग में उसमें जहाँ- तहाँ अनैतिक और अहितकर मान्यताओं और रूढ़ियों का भी समावेश होने लगा और आज जो रूप हिंदू धर्म का हमारे सामने है, उसमें कई चीजें बहुत खटकने वाली ही नहीं, उन भावनाओं के सर्वथा प्रतिकूल भी हैं, जिनको लेकर ऋषियों ने इस महान धर्म की रचना की थी ।।

ऐसी विकृतियों में पशुबलि को सर्वोपरि कलंकी प्रथा कहा जा सकता है ।। मूक पशु- पक्षियों का देवी- देवताओं के नाम पर कत्ल किया जाना उन देवताओं की महिमा को समाप्त करके सारे सभ्य समाज के सामने उन्हें गुणित, निंदित, नीच, क्रूर एवं हत्यारा सिद्ध करना है ।। जिस देवता को प्रसन्न करने के लिये बलि चढ़ाई जाती है, वस्तुत उन्हें असीम कष्ट और असीम लज्जा इस कुकृत्य से होती है ।।

Table of content

1. पशुवबलि हिंदू धर्म पर कलंक है
2. अर्थ का अनर्थ हो गया
3. पशु शब्द के विभिन्न अर्थ
4. पशुबलि से नरक मिलता है
5. पशुबलि का निषेध
6. महाभारत में हिंसा का विरोध
7. पुराणों की पशुबलि विरोधी घोषणाएँ
8. स्मृतियों में अहिंसा का प्रतिपादन
9. यज्ञों में पशुबलि का निषेध
10. यज्ञबलि का सार्थक भाव-देव दक्षिणा
11. यह अंध-विश्वासी प्रथा बंद होनी ही चाहिए
12. आत्मा की अमरता का सिद्धांत
13. धर्म शास्त्रों का आदेश
14. देवी देवताओं को बदनाम करने वाले
15. अन्य मतावलंबियों द्वारा जीव हिंसा का निषेध


Author Pt Shriram sharma acharya
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 64
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 10:59:PM
  • 24 Jan 2020




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