शिखा और सूत्र की रहस्यमय विवेचना

Author: Pt shriram sharma acharya

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Preface

उपवीती भवेन्नित्यं विधिरेषः सनातन: ।।

वशिष्ठ स्मृति
सदा उपवीती होकर रहे यह सनातन विधि है ।।

आर्य जीवन, उद्देश्यमय जीवन है ।। जो लोग निरुद्देश्य जीते हैं, खाते, पीते, सोते, कमाते, स्त्री सेवन करते और मर जाते हैं, ऐसे लोगों जीवन पशु तुल्य है ।। हिन्दू धर्म ऐसे जीवन को घृणा की दृष्टि से देखता है और उपदेश करता है कि हर व्यक्ति सदा उपवीती होकर रहे ।। अर्थात उद्देश्यमय जीवन व्यतीत करे ।। यह सनातन विधि है -ईश्वरीय आज्ञा - आत्मा का स्वाभाविक कर्तव्य है ।। उद्देश्यमय जीवन में प्रवेश कराने के लिए ही यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है।

Table of content

1. उपवीत की आवश्यकता
2. यज्ञोपवीत के महान लाभों का कारण
3. उपवीत और द्विजत्व
4. यज्ञोपवीत के तीन लड़, नौ तार और ९६ चौवे
5. नौ लड़ें क्यों होती हैं?
6. ९६ चौबे का कारण
7. कान पर जनेऊ चढ़ाने का हेतु
8. नियमोपनियम
9. यज्ञोपवीत के पूजन का मन्त्र
10. यज्ञोपवीत संस्कार पर दृष्टिपात
11. ब्रह्मसूत्र का प्रयोजन
12. शिखा का महत्त्व

Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 40
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 12:58:PM
  • 6 Jun 2020




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