यम नियम

Author: Pt shriram sharma acharya

Web ID: 736

`12 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

महर्षि पातंजलि के बताये हुए राजयोग के आठ अंग हैं ।
(1) यम,(2) नियम,(3) आसन,(4) प्राणायाम,(5) प्रत्याहार,(6) धारणा,(7)ध्यान,(8) समाधि । इन आठ में प्रारम्भिक दो अंगों का महत्त्व सबसे अधिक है । इसीलिए उन्हें सबसे प्रथम स्थान दिया गया है । यम और नियम का पालन करने का अर्थ मनुष्यत्व का सवर्तोन्मुखी विकास है । योग का आरम्भ मनुष्यत्व की पूर्णता के साथ आरम्भ होता है । बिना इसके साधना का कुछ प्रयोजन नहीं ।

योग में प्रवेश करने वाले साधक के लिए यह आवश्यक है कि आत्म-कल्याण की साधना पर कदम उठाने के साथ-साथ यम-नियमों की जानकारी प्राप्त करें । उनको समझें, विचारें, मनन करें और उनको अमल में, आचरण में लाने का प्रयत्न करें ।

यम-नियम दोनों की सिद्धियाँ असाधारण हैं । महर्षि पातंजलि ने अपने योग दर्शन में बताया है कि इन दसों की साधना से महत्त्वपूर्ण ऋद्धि-सिद्धियाँ प्राप्त होती है । हमारा निज का अनुभव है कि यम-नियमों की साधना से आत्मा का सच्चा विकास होता है और उसके कारण जीवन सब प्रकार की सुख-शन्ति से परिपूर्ण हो जाता है ।

Table of content

1. यम और नियम
2. पाँच नियम
3. यम नियमों का तात्पर्य

Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2012
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 48
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 03:05:AM
  • 31 May 2020




Write Your Review



Relative Products