विवाह संस्कारो मे विकृतियाँ न जोडे़ं

Author: Pt shriram sharma acharya

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Preface

विवाह संस्कारों में विकृतियाँ न जोड़े

किसी महान प्रयोजन को लक्ष्य मानकर जाने वाले धर्मसेवी, लोकसेवी, परिव्राजक स्तर के महापूरुष तो अविवाहित जीवन में भी सुविधा अनुभव करते हैं, पर सामान्यजनों को सामान्य जीवन में विवाहित रहकर काम चलाना ही सुविधाजनक पड़ता हैं ।। इसमें प्रकृति की प्रेरणायेँ भी पूरी होती हैं ।। पेट की भूख कमाने के लिये बाधित करती हैं और वंश वृद्धि की ललक कामुकता के रुप में गृहस्थी बसाने की प्रेरणा देती हैं ।। साधारणतया इन्हीं दो कार्यों की शृंखला जीवन अवधि को व्यस्तता के बीच पूरी कर देती है। जीवन संकट इन्हीं दो प्रयासों की लोक पर घिसटता रहता है और आयुष्य की अवधि पूरी कर लेता है। यही प्रचलन भी है और यही सर्वसुलभ और सुविधाजनक भी। तरुणाई के आगमन वाले दिनों में सामान्यता ऐसी प्रकृति प्रेरणा होती है की जोड़ा बनाकर रहें।नये रक्त के साथ जुड़ी हुई उमगें इसके लिये प्रेरित भी करती है,उन्हें छोड़कर सामान्यजन विवाह की इच्छा करते और उसका सरंजाम भी जुटाते है।

इस संदर्भ में उससे अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है, जितनी कि आमतौर से बरती जाती है। लोग सुंदर शरीर वाला साथी पाने की फिराक में रहते है। चयन प्राय: इसी आधार पर हो सका तो प्रसन्नता व्यक्त की जाती है।इसके अतिरिक्त लड़के का कमाऊ और लड़की का चुलबुलापन भी पसन्दगी का कारण माना जाता है।

Table of content

• आयु की मर्यादा ध्यान में रखी जाय
• बाल विवाह एक अभिशाप
• विवाहोत्सव का चित्र-विचित्र सरंजाम
• यह अनावश्यक अपव्यय बन्द हो
• बदनामी के साथ-साथ घाटा भी
• सादगी भरे विवाह समय की माँग
• बारात के नाम पर खर्चीली हुल्लड़बाजी बन्द हो
• विवाह घरेलू उत्सव बने,प्रदर्शन का अखाड़ा नहीं
• उत्सव की विकृति की परिणति बाद तक भी
• विवाह संबन्धों में बाधक कुछ भ्रान्त मान्यतायें
• परिवर्तन की दिशा में गतिशील प्रयास
• संतानोत्पादन सम्बन्धी तहती दायित्व
• परिवार संस्था एक छोटा प्रजातंत्र,जो अनिवार्य है
• विकृतियाँ हटें,कुप्रथायें मिटें

Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2008
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 32
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 08:08:AM
  • 25 Jan 2020




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