दो घिनौने मुफ्तखोर, कामचोर

Author: Pt shriram sharma acharya

Web ID: 701

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Preface

परिश्रम के बिना धनाकाँक्षा प्रकृति को पसंद नही

समुद्र अन्वेषी अंग्रेज कप्तान वैज्ञानिकों का एक दल लेकर सन् १७५८ में लंबी यात्रा पर था ।। इसमें उसने इंग्लैण्ड से लेकर आस्ट्रेलिया, तक के लंबे क्षेत्र के प्रामाणिक नक्शे तैयार किए थे, साथ ही उस बहुमूल्य संपदा का पता लगाने का प्रयत्न किया जो समय- समय पर डूबे हुए जहाजों के कारण समुद्र तल में डूबी पड़ी है ।। एक तूफान में फँस जाने के कारण सन् १७७० में ग्रेट वैरियर रीफ के समीप उसने अपने जहाज पर लदी छै: तोपें भी पानी में फेंक दी थी ।। कप्तान कूक के द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों में से कुछ गुम हो गए है अस्तु उसके कामों का फिर सर्वे करना पड़ रहा है ।। उसने जिस स्थान पर अपनी तोपें फेंकी थी उसी के नजदीक बहुत- सी संपत्ति समुद्र तल में होने का संकेत था ।। अस्तु उस स्थान को ढूँढ़ने का प्रयास नए सिरे से करना पडा ।।

पिछले दो सौ वर्षो में एक के बाद एक खोजी दल दस बार उस क्षेत्र में गए, पर उन तोपों के डुबोए जाने के स्थान का सही पता न लगा सके ।। अब फिलाडेल्फिया की प्रकृति विज्ञान एकेड़मी के एक खोजी दल ने उस स्थान को ढूँढ़ निकाला और छहों तोपें सुरक्षित रूप से प्राप्त कर ली गई है ।। अब अगला कदम उन स्थानों का पता लगाने का है जहाँ बड़ी धनराशि मिलने की संभावना है ।।

Table of content

1. परिश्रम के बिना धनाकाँक्षा प्रकृति को पसंद नहीं
2. पल्ले पश्चात्ताप ही पडा़
3. अनावश्यक धन-संग्रह विपत्ति उत्पन्न करता रहेगा
4. मुफ्तखोरी सदा अनिष्ट प्रेरणाओं की जननी
5. भ्रांत धारणाएँ
6. संचित संपदा या अभिशाप
7. धन-समृद्धि के लिए सही कदम उठाएँ
8. इतने पाँव पसारिये, जितनी चादर होय

Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2015
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 48
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 06:45:PM
  • 12 Nov 2019




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