सेवा धर्म की सिद्ध साधिकाएँ

Author: Pt Shriram sharma acharya

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Preface

पीड़ित मानवता की उन्नायक भगिनी निवेदिता

भगिनी निवेदिता का बचपन का नाम मार्गरेट नोबुल था ।। नोबुल का जन्म २८ अक्टूबर १८६७ को एक आयरिश परिवार में हुआ था ।। पिता का नाम सैम्युअल रिचमंड तथा माता का नाम मेरी हैमिल्टन था ।। नोबुल को जन्म से ही धार्मिक वातावरण मिला था ।। उसके पिता एक इसाई धर्म प्रचारक थे ।। इसी संदर्भ में घर पर अनेक पादरियों का आना- जाना लगा रहता था ।। भारत में धर्म प्रचार हेतु भेजे गए एक पादरी ने नौबुल के सिर पर बड़े स्नेह से हाथ रखते हुए कहा था- भारत को किसी दिन इस बालिका की आवश्यकता पड़ेगी । और उस पादरी की भविष्यवाणी अक्षरश: सत्य सिद्ध हुई ।। रिचमंड की मृत्यु भी २४ वर्ष की अल्प आयु में हो गई थी, पर उनके द्वारा कहे गए अंतिम शब्द नोबुल के लिए बड़े महत्त्व के थे ।। उन्होंने कहा- नोबुल के जीवन में एक पुकार आएगी ।। जब भगवान की ओर से उसके लिए निमंत्रण आए तो उसे रोकना मत ।। उसके द्वारा मानवता की सेवा के लिए महान कार्य संपन्न होंगे ।

सन १८८६ में उन्होंने ऐजाम नामक स्थान पर १६ वर्ष की आयु में अध्यापन का कार्य प्रारंभ कर दिया था ।। उन्होंने १८६२ में रस्किन स्कूल की स्थापना करके, बच्चों को नैतिकता की ओर ले जाने के लिए भरसक प्रयत्न किया ।। १८ वर्ष की आयु भावी जीवन के स्वर्णिम स्वप्न देखने की होती है, उस समय नोबुल का मन अशांत रहने लगा था ।। वह कभी गिरजाघर में तो कभी एकांत स्थान पर चिंतन- मनन में खोई हुई मिलती थी ।।

Table of content

1. सेवा धर्म की सिद्ध साधिकाएँ
Author Pt Shriram sharma acharya
Edition 2007
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 64
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 02:57:PM
  • 13 Nov 2019




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