युगऋषि एवं उनकी योजना

Author: Brahmavarchas

Web ID: 642

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Preface

युगऋषि (परम पूज्य गुरुदेव) की जन्मशताब्दी मनाने का उत्साह उनके स्नेह बन्धन में बँधे हर परिजन के मन में उमड़ रहा है । यह बात सच है, किन्तु उस उत्साह की दिशाधारा की, उसके अनुरूप साधन-सामर्थ्य की समीक्षा करते हुए उसकी समुचित व्यवस्था भी तो करनी पड़ेगी ।

भावनाशील बच्चों में अपने माता-पिता को संतुष्ट करने का उत्साह बहुधा उमड़ा करता है । वे कभी अपनी खिलौना मोटर में बिठाकर उन्हें सैर कराने का उत्साह दिखाते हैं, कभी अकेले सब काम देख लेने का उत्साह दिखाते हुए उन्हें विश्राम करने को कहते हैं, तो कभी अपने खेल के बर्तनों में तरह-तरह के व्यंजन बनाकर उन्हें इच्छित भोजन कराने की उमंग प्रकट करते हैं ।

Table of content

1. उत्साह की सार्थक दिशा
2. क्या तैयारी, कैसी तैयारी ?
3. ऋषि मनीषी सबके होते हैं
4. उनके स्वरुप का दर्शन
5. ऋषि स्तर का व्यक्तित्व और दायित्व
6. युगांतकारी पुरुषार्थ
7. धारणा से साधना सफलता
8. सार्थक शाश्वत प्रतीक चुनें
9. व्यसनी नहीं समझदार बनें
10. समझें-समझाएं, बढ़ें बढ़ाएं
11. त्रिवेणी संगम
12. त्रिवेणी निर्माण
13. परिवार निर्माण
14. समाज निर्माण
15. त्रिविध क्रांतियाँ
16. त्रिविध उपलब्धियां
17. कुछ अन्य सूत्र

Author Brahmavarchas
Edition 2015
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 48
Dimensions 9 cm x 12 cm
  • 11:05:AM
  • 29 Jan 2020




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