युगऋषि की अपेक्षाएँ हम सबसे

Author: Pt shriram sharma acharya

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Preface

परम पूज्य गुरुदेव गायत्री परिवार को युग परिवर्तन के उद्देश्य से अवतरित जाग्रत आत्माओं का संगठन कहते रहे हैं। लेकिन जागृतात्माओं पर भी समयानुसार माया का -विस्मृति का आवरण पड़ जाता है ।। उसे हटाने पर ही वे अपनी क्षमता का उपयोग कर पाते हैं। समुद्र लाँघकर लंका से सीता की सुधि लाने के प्रसंग में हनुमान जी चुप बैठे थे, जामवन्त के बोध- वाक्यों से उन्हें स्मृति आई और असंभव सा लगने वाला कार्य उन्होंने कौतुक की तरह कर दिखाया ।।

इस संकलन में संगृहीत युगऋषि के बोध वाक्य जागृतात्माओं को अपना स्वरुप और अपने कर्त्तव्य का स्पष्ट बोध करा कर उन्हें दिव्य क्षमता जगाने और
प्रखर पुरुषार्थ में जुट पड़ने के लिए प्रेरित कर सकेंगे,ऐसा विश्वास है।

-प्रकाशक
Author Pt shriram sharma acharya
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 48
Dimensions 9 cm x 12 cm
  • 05:56:AM
  • 23 Feb 2020




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