सम्मान के पात्र हमारे वयोवृद्ध

Author: Bhagwati Devi Sharma

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Preface

वृद्धों को आदर देने एवं उनकी सेवा करने से आयु, विद्या,यश और बल की वृद्धि होती है-यह आप्त वचन है । परंतु वर्तमान परिस्थितियों एवं नई शिक्षा-सभ्यता ने नई पीढ़ी में जहाँ अन्य अनेक अवांछनीयता ओं को ठूँसा और असम्मान का भाव भीपनपाया है । यह एक आत्मघाती प्रवृत्ति है जिससे जितनी जल्दी छुटकारा पाया जा सके उतना ही वांछनीय होगा । पश्चिम इस प्रवृतिके दुष्परिणामों को अनुभव करके अब पछता रहा है, कहीं हमें भीन पछताना पड़े । वृद्धों के अनुभवों की प्रौढ़ताका लाभ उठाया जाना चाहिए, उनके आयु के वार्धक्य का सम्मान किया जाना चाहिए और उनकी शारीरिक अक्षमता के प्रतिमानवीय संवेदनाओं से भरा भाव समरसता एवं उत्थान के लिए यही अभीष्ट है ।

Table of content

१. परिवारिक जीवन में वृद्धोंकी भूमिका
२. वृद्धों के सम्मान की परंपराका संरक्षण हो
३. वयोवृद्धों का सम्मान-नईपीढी का उत्तरदायित्व
४. पिता-पुत्र के संबंध बिगड़नेन पाएँ
५. बडो़ का सम्मान-सर्वसुलभ जीवन साधना
६. बड़ों के प्रति कृतज्ञता का प्रतिदान दें
७. वृद्ध हमारे देवता, उन्हें अप्रसन्न न करें
८.वृद्ध कुछ आत्मावलोकन भी करें.
९.ध्यान रहे आप भी वृद्ध होंगे.
Author Bhagwati Devi Sharma
Edition 2013
Publication Yug Nirman Yogana, Mathura
Publisher Yug Nirman Yogana, Mathura
Page Length 32
Dimensions 181mmX120mmX2mm




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