अमृत वचन जीवन के सिद्ध सूत्र

Author: Pt shriram sharma acharya

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Preface

परम पूज्य गुरदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी अपने परिजनों को अपना ज्ञानामृत हृदय की गहरी भवनाओं के साथ पिलाते रहे हैं । उनके प्रवचनों में उनके गहरे भाव एवं दर्द समाया हुआ है । उन्होंने जीवन निर्माण के सार सूत्रों को अति सरल शब्दों में समझाया है । उनके ये शब्द हमारी सब समस्याओं का समाधान करने में समर्थ हैं, हमें महामानव, देव-मानव बनाने में आध्यात्मिकता की ऊँची भाव स्थिति में ले जाने में पूर्ण सक्षम है , बस पूरे हृदय से इन शब्दों का अनुपालन किया जा सके । अपने आत्म-सुधार के प्रयासों में ये शब्द उत्प्रेरक बनकर हमें प्रेरित एवं प्रोत्साहित करतें रहेंगे । उनके प्रवचनों के प्रायः 5-5 मिनट के सार-अंश जो शान्तिकुञ्ज के प्रांगण में नित्य प्रातः गूँजते रहते हैं।

Table of content

• अपने व्यक्तित्व को बदलिये
• देवता बनिये, स्वर्ग में रहिये
• विधेयात्मक चिन्तन से देवता बनिये
• चिंतन का महत्त्व
• मनन का महत्त्व
• उपासना का महत्त्व
• हंस बनिये
• उत्थान और पतन
• बोना और काटना
• समयदान का महत्त्व
• ज्ञानसम्पदा
• व्यक्तिनिर्माण, परिवारनिर्माण और समाज निर्माण
• जन्मदिन का महत्त्व
• सच्ची आध्यात्मिकता
• अखण्ड दीपक
• त्याग-समर्पण
• पूजा-उपासना के लाभ
• पूजा-उपासना के मर्म
• जीवन कैसे जीये
• साधक कैसे बनें?
• सामाजिक क्रान्ति
• एक विशेष समय
• युग परिवर्तन
• संकल्पवान् व्रतशील बनें
• विधि नहीं, विधा समझें

Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 80
Dimensions 140X213 mm
  • 01:58:AM
  • 20 Jul 2019




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