अवांछनीय प्रचलनों को उलटने की आवश्यकता

Author: Pt shriram sharma acharya

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Table of content


• धर्म क्या है ? विकृतियाँ कैसे पनपती हैं ?
• अंधविश्वासों के जाल में न उलझें
• मानवी गरिमा पर एक कलंक-नरबलि
• कैसा विचित्र है अंधविश्वासों के साये में पलता यह जीवन !
• भेदभाव की दुष्प्रवृत्ति को उखाड़ फेंका जाए
• सामाजिक एकता का घुन जाति-पाँति
• परंपराओं का नहीं, विवेक का अनुसरण करें
• औचित्य कि कसौटी पर इन्हें कसें
• अवांछनीय प्रचलनों से समझौता न किया जाए
• राष्ट्र पर लगा कलंक-भिक्षा व्यवसाय


Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2010
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 64
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 05:11:AM
  • 23 Jan 2020




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