सदगुण बढ़ाएँ सुसंस्कृत बने

Author: Pt Shriram sharma acharya

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Preface

सद्गुण भी हमारे ध्यान में रहे

मनुष्य के पास सबसे बड़ी पूँजी सद्गुणों की है ।। जिसके पास जितने सद्गुण हैं, वह उतना ही बड़ा अमीर है ।। रुपया के बदले बाजार में हर चीज खरीदी जा सकती है। इसी प्रकार सद्गुणों की पूँजी से किसी भी दिशा में अभीष्ट को प्राप्ति की जा सकती है। गुणहीन व्यक्ति अपनी व्यर्थता, निरर्थकता के कारण सबकी दृष्टि में हीन और हेय बने रहते हैं, कोई उनकी पूछ नहीं करता, उनकी और ध्यान नहीं देता, बेचारे अपनी जिंदगी जीते और अपनी मौत मरते रहते हैं ।। ऐसे लोगों के लिए किसी प्रकार जिन्दगी के दिन काट लेना ही पर्याप्त होता है ।। ये लोगों की दृष्टि में उपहास या दया के पात्र बने रहते हैं ।। किसी महत्त्व के कार्य में उनकी पूछ नहीं होती, सदा पीछे ही धकेले जाते रहते हैं ।।

दुर्गुणी व्यक्ति बहुधा स्वार्थी होते हैं ।। वे दूसरों से चाहते तो बहुत हैं पर बदले में देने के लिए उनके पास कुछ नहीं होता ।। इसलिए डरा- धमकाकर अपना प्रयोजन सिद्ध करने की कोशिश कस्ते हैं ।। गुंडे, उद्दंड, उच्छृंखल ,चोर,डाकू,लूटेरे,झगड़ालू प्रकृति के लोग अपनी हानि पहुँचाने की क्षमता का प्रदर्शन करके दुर्बल मन वालों को आतंकित कर लेते हैं और फिर उनसे अपना स्वार्थ साधने की चेष्टा करते हैं ।। पर काठ की हाँडी देर तक नहीं चढ़ती ।। सभी लोग उनके विरोधी होते हैं और घृणा के भाव रखते हैं ।। जब भी अवसर मिलता है प्रतिशोध ले लिया जाता है ।।

Table of content

• सद्गुण भी हमारे ध्यान में रहें
• सम्मान इस तरह मिलता है
• सच्ची लोकप्रियता इस तरह मिलती है
• प्रभावशाली व्यक्तित्व यों बनता है
• गुणेषु क्रियतां यत्नः
• जीवन में सादगी की आवश्यकता और उपयोगिता
• अंदर और बाहर की पवित्रता

Author Pt Shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 32
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 12:49:AM
  • 1 Dec 2020




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