अपने अंग अवयवों से

Author: Brahmvarchas

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Preface

शिष्यों की संजीवनी : गुरु का शिक्षण

परम पूज्य गुरुदेव के जीवन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता रही है अनवरत शिक्षण । उनने अपने आपको सभी तरह के आकर्षणों-विज्ञापन प्रचार आदि से दूर रह व्यक्ति गढ़ने में समय लगाया । जो भी कुछ उनने अपने गुरु से पाया एवं जिस आधार पर कठोर तपक्षर्या कर एक " युग निर्माण योजना " का स्वरूप गढ़ने में सफल हुए, उन सबके मूल में उनका संकल्पित निश्चय ही था । वे एक आदर्श शिष्य बने, तपोनिष्ठ बने एवं वेदमूर्ति बने । यह उनकी प्रत्यक्ष सिद्धि है ।

Table of content

1. शिष्यों की संजीवनी गुरु का शिक्षण
2. एक स्पष्ट निर्देश
3. जिम्मेदारी सभी अंग अवयवों से
4. निमित्त मात्र बन जाएँ
5. बड़ा है उसका नाम ऐसी है योजना
6. हम सब उनके घटक
7. अधिकाधिक श्रम व एकनिष्ठ समर्पण
8. हनुमान से कम स्तर के न हों हम
9. समर्पण का सातत्य चाहिए
10. काम बदलेंगे, बनेंगे, बिगड़ेंगे
11. निशाना लक्ष्य तक पहुंचेगा
12. साधनों की बात नहीं अपने परिष्कार की बात सोचें
13. कहीं थके तो नहीं
14. सुविधाओं की ललक लिप्सा
15. श्रद्धा संवर्धन करें
16. कई गुना विस्तार होगा
17. घुस पड़ें रामपंचायतन में
18. नित्य का अनुशासन
19. योगेश्वर के रूप में घोषणा
20. चार कसौटियों पर करें मूल्यांकन

Author Brahmvarchas
Edition 2015
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 40
Dimensions 9 cm x 12 cm
  • 07:03:PM
  • 15 Nov 2019




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