जीवन पथ के प्रदीप

Author: Dr Pranav pandaya

Web ID: 548

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Preface

जीवन पथ के प्रदीप आपको उजियारे की सौगात सौंपने के लिए आए हैं । जीवन के लिए उजियारा बहुत जरूरी है । पथ पर उजियारा न हो तो अनायास ही भय, भ्रम और भटकन घेर लेते हैं । अँधेरे में, मन में अचानक ही अवसाद, विषाद का कुहाँसा छा जाता है । खिन्नता-विपन्नता ऐसे में जीवन का जैसे अविभाज्य अंग बन जाती है ।
आज की दशा कुछ ऐसी ही हो गयी है । मनुष्य के जीवन पथ, उसकी चेतना को अंधियारी ने घेर लिया है । वह भयभीत है, भ्रमित है, विषादग्रस्त है । अपने ही भ्रम में उसने स्वयं की छाया को भूत समझ लिया है और भयक्रान्त हो गया है । इसी भय और भ्रम में फँस कर उसने अपने से, अपनों से यद्ध छेड़ दिया है । लगातार चोटिल होने के बावजूद वह लड़े जा रहा है और उसके घाव बड़े जा रहे हैं ।

अंधियारे के कारण न तो किसी को सूझ रहा है और न समझ में आ रहा है कि वह किसी और से नहीं बल्कि अपने से और अपनों से लड़े जा रहा है । चोटें बढ़ रही हैं, घाव रिस रहे, पर इन्सान का उन्माद व उसका अवसाद कम नहीं हो रहा है । इनमें कमी तभी आ सकती है, जबकि जीवन पथ का अंधियारा घटे, हटे और मिटे ।

Table of content

• हम अपने भीतर झाँकना सीखें
• सफलता के मणिमुक्तक पाएँ तो कैसे ?
• आस्तिकता का यथार्थ
• गहना कर्मणो गतिः
• जीवन में त्याग की प्रतिष्ठा ही "मोक्ष"
• नर से नारायण बनने का परम पुरुषार्थ
• आत्मिक प्रगति का अवलम्बन : सेवा-साधना
• आत्मविजेता ही विश्वविजेता
• महानता से नाता जोड़ने की सूझबूझ
• भगवान् पवित्रता के क्षीर सागर में विराजते हैं
• सन्धिकाल की विषमवेला में वरिष्ठों का दायित्व
• काश! मनुष्य "जीवन देवता" के स्वरूप को समझ पाता
• वास्तविक अध्यात्म क्या है?
• धारा को चीरकर चल पडने जैसा पराक्रम
• सन्त, सुधारक और शहीद
• सच्चे शिष्य की पहचान
• भाग्य विधाता है मनुष्य अपने आपका
• जीवन एक कलाकार की तरह जीना सीखें
• समर्थ के अवलम्बन से ही आत्मिक प्रगति
• शान्तिकुञ्ज-प्रत्यक्ष कल्पवृक्ष
• जगज्जननी की कृपा से नारी का स्वरूप बोध

Author Dr Pranav pandaya
Edition 2013
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 220
Dimensions 14 cm x 21.5 cm
  • 08:10:AM
  • 25 Jan 2020




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