अनीति से जूझने वाले राष्ट्र को समर्पित शूरवीर

Author: Pt. Shriram Sharma Aacharya

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Preface

फाँसी के फंदे पर लटकने से पहले जेल अधिकारी ने कैदी से पूछा- "आपकी अंतिम इच्छा क्या है ?"
कैदी मुस्काया, उसने कहा- "मैं चाहता हूँ कि मुझे शीघ्र से शीघ्र फाँसी दी जाए ताकि मेरा यह जन्म समाप्त हो और दूसरा जन्म लेकर भारत को स्वतंत्र कराने के प्रयत्न में दूसरी बार फाँसी के फंदे को पुन: चूम सकूँ ।"

यह कैदी कोई साधारण कैदी न था । किसी चोरी, डकैती या कत्ल करने के अपराध में जेल के सींखचों में बंद न किया गया था । वरन यह देशभक्त था और देश को स्वतंत्रता दिलाने का प्रयत्न ही इसका अपराध था । नाम था-सोहनलाल पाठक।

मांडले की जेल । १० फरवरी, १११६ की एक सुबह । अमर शहीद सोहनलाल पाठक को फाँसी के तखते पर चढ़ाया । जल्लाद उस निरपराधी की जीवन लीला समाप्त होते देख आँसू बहा रहे थे और पाठक अपने देश पर न्योछावर होने में प्रसन्नता तथा गर्व का अनुभव कर रहे थे । भला जिस देश में ऐसे बहादुर हों, उस देश की स्वतंत्रता को रोक भी कौन सकता था ?
सोहनलाल पाठक का जन्म सन् १८८३ में हुआ था । परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण स्कूली शिक्षा से शीघ्र ही संबंध तोड़ना पड़ा और लाहौर के डी. ए. वी. स्कूल में केवल २१ रु. मासिक पर शिक्षक का कार्य करना पड़ा ।

Table of content

1. मातृभूमि के बलिदानी सोहनलाल पाठक
2. विस्मृत क्रांतिवीर पंडित गेंदालाल दीक्षित
3. अन्याय के सामने सर न झुकाने वाले- लाला लाजपत राय
4. अमर शहीद डॉ मथुरा सिंह
5. स्वतंत्रता और समाजवाद के अग्रदूत डॉ राम-मनोहर लोहिया
6. साहस के धनी कन्हाईलाल दत्त
7. राष्ट्र को समर्पित बारहट परिवार
8. सोते कुमायूँ को जागने वाला शेर बद्रीदत्त वैष्णव
9. सूफी अंबाप्रसाद जो राष्ट्र हित में बलिदान हो गये
10. उत्कट देशभक्ति के प्रतीक राव तुलाराम
11. राष्ट्ररक्षा को समर्पित मेजर मेघसिंह
12. राष्ट्रीय स्वाभिमान के रक्षक बालाजी विश्वनाथ

Author Pt. Shriram Sharma Aacharya
Edition 2015
Publication Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 64
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 08:43:PM
  • 20 Nov 2019




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