लाला लाजपत राय

Author: Pt shriram sharma acharya

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Preface

भारतीय स्वाधीनता को करने में जिन शिल्पियों का आदरणीय योगदान रहा है, पंजाब- केसरी लाला लाजपत राय का अन्यतम स्थान है ।।
किसी चिरस्मरणीय जन- सेवा में सफलता पाने के लिए जिन गुणों की आवश्यकता होती है, उनका विकास करने के लिए उन्होंने कठोर साधना की थी ।। लाला लाजपत राय के अप्रतिभ व्यक्तित्व के चार स्तंभ थे ।। लगन, पुरुषार्थ, साहस और धैर्य ।।

लाला एलाजपतराय क आत्म- निर्मित व्यक्ति थे ।। वे उन अवसर प्राप्त अग्रस्थों में नहीं थे, जिन्हें पैतृक- परंपरा से साधन और सुविधाएँ मिल जाया करती है ।। लाला लाजपत राय ने अपने को उद्योग की तपस्या में तिल- तिल तपाकर कण- कण गढ़ा था ।।

लाला लाजपत राय का जन्म एक अत्यंत निर्धन वैश्य परिवार में २८ जनवरी सन् १८६५ में पंजाब के जिला फीरोजपुर की मोगा तहसील के अंतर्गत एक छोटे- से गाँव ढोडिग्राम मे हुआ था ।। यह ग्राम उनका ननिहाल था ।। कुछ परंपरा और कुछ निर्धनता के कारण इनके पिता श्री राधाकृष्ण ने इनकी गर्भवती माता गुलाबदेवी को उनके पिता के घर भेज दिया था ।।

लाला लाजपत राय के पिता श्री राधाकृष्ण एक साधारण अध्यापक थे ।। मात्र पच्चीस रुपये वेतन पाते थे, जो अंत में जाकर पैंतीस रुपये मासिक हो गया था ।। ऐसे निर्धन पिता से ऐसी आशा कैसे की जा सकती थी कि वे अपने पुत्र को वकालत जैसी उच्च शिक्षा दिला सकते थे ? किंतु लाला लाजपत राय ने अपने उद्योग और परिश्रम के बल पर वकालत की उच्च परीक्षा पास की और एक सफल वकील बने ।। उन्होंने अपनी उन्नति के लिए अपने अन्य भाई- बहिनों के साथ अन्याय नहीं किया ।।

Table of content

लाला लाजपत राय
Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 32
Dimensions 121X181X3 mm
  • 06:01:PM
  • 15 Nov 2019




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