संतान की संख्या ना बढायें

Author: pt shriram sharma acharya

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Preface

संतान की संख्या न बढ़ाइए
बढ़ती आजादी चढ़ती समस्याएँ

इस समय संसार की जनसंख्या लगभग सात अरब बताई जाती है। वृद्धि का औसत ५ करोड़ वार्षिक प्रकट किया जाता है ।। इस हिसाब से अगले १०० वर्षों में लगभग इतनी ही जनसंख्या और तैयार हो जाएँगी ।। तब इस पृथ्वी के निवासियों की समस्याएँ कितनी गंभीर हो जाएँगी, इसका अनुमान भिन्न- भिन्न विद्वानों, समितियों एवं जनसंख्या विशेषज्ञों ने भिन्न- भिन्न प्रकार से किया है ।। ऐलिनाय विश्वविद्यालय के भीतिकशास्त्री प्रो० हीजबान फोस्टेर का कथन है- शुक्रवार १३ नवंबर, सन् २०२६ को मनुष्य जाति का अंत हो जाएगा ।। इस दिन जनसंख्या की वृद्धि अपनी चरम भीमा पर पहुँच गई होगी ।। प्रत्येक व्यक्ति के हिस्से में एक वर्ग फुट जमीन आवेगी, जो मुश्किल से खड़े होने भर के लिए पर्याप्त होगी और तब लोग आपस में लड़- झगड़कर भुखमरी, अकाल और युद्ध के कारण अपने आप नष्ट हो जाएँगे ।।

केलिफोर्निया औद्योगिक संस्थान के डॉक्टर जेम्स बोनर ने एक रिपोर्ट में लिखा है- 'विश्व की आबादी प्रति वर्ष पाँच करोड़ के हिसाब से बढ़ रही है ।। यदि यही गति चलती रही और इसे रोका न गया तो कुछ दिन में ही वह स्थिति आ जाएगी कि इस लंबी- चौड़ी धरती पर पैर रखने की भी जगह न रहेगी ।।

Table of content

• बढ़ती आबादी चढ़ती समस्यायें
• घुटते घर लुटते भाग्य
• जनसंख्या वृद्धि की सतह में
• अधिक बच्चे उत्पन्न करना एक सामाजिक अपराध
• अंधाधुंध प्रजनन हर दृष्टि से अदूरदर्शितापूर्ण
• जन्मदर घटाने में इस प्रकार योगदान दीजिये
• परिवार नियोजन का सच्चा स्वरुप

Author pt shriram sharma acharya
Edition 2013
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 40
Dimensions 121X182X1 mm
  • 02:55:PM
  • 13 Nov 2019




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