जीवन निर्माण -74

Author: pt shriram sharma acharya

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Preface

काव्य में लालित्य होता है । एक अनोखी मिठास होती है । जो बात गद्य के बड़े-बड़े ग्रंथ नहीं कह पाते, वह पद्य की दो पंक्तियों कह जाती हैं । इतनी गहराई तक प्रवेश करती हैं कि सीधे अंतःकरण को छूती हैं । यही कारण है कि साहित्य में भाव- संवेदनाएँ संप्रेषित करने हेतु सदा काव्य का प्रयोग होता है । वेदव्यास भी ज्ञान का संचार जो उन्हें योगेश्वर से मिला गीता के श्लोकों के द्वारा देववाणी में देते हैं और ठेठ देशी अवधी भाषा में श्रीराम का चरित्र तुलसीदास जी देते हुए नीति का सारा संदेश दे जाते है । महावीर प्रसाद गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, मैथिलीशरण गुप्त, सुभद्रा कुमारी चौहान, माखनलाल चतुर्वेदी आदि अपनी इसी गहराई तक संदेश देने की कला-विधा के द्वारा जन-जन में सराहे गए ।


परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्रीराम शर्मा जी (११११-२०११) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में इससे श्रेष्ठ कि उन्हीं के ऋषितुल्य मार्गदर्शन में, चरणों में बैठकर जिन कवियों ने काव्य रचा, कविता लिखना सीखा, अपनी मंजाई की, उनके गीतों के वाड्मय के खंड प्रस्तुत किए जाएँ । बिन गुरु ज्ञान नहीं, नहीं रे जो भी कुछ ज्ञान काव्य की इन पंक्तियों में प्रस्कुटित हुआ है, उसका मूल प्राण है, आधार है- परमपूज्य गुरुदेव का संरक्षण व मार्गदर्शन । आज के आस्था संकट के इस दौर में अखण्ड ज्योति पत्रिका (११३७-२०११-अनवरत प्रकाशित) ने कविताओं के द्वारा हिंदी साहित्य को नूतन दिशा दी, ऐसा कहा जाए तो अत्युक्ति न होगी । आचार्यश्री करुण हृदय थे, अगणित व्यक्तियों को उनने प्यार बाँटा, संवेदना के घेरे में आबद्ध कर पारिवारिकता के सूत्र में पिरो लिया तथा प्यार की ताकत कितनी होती है, यह प्रमाणित किया ।

Table of content

1. युद्ध के दीवानों से
2. प्यार भरा परिवार
3. अंगारे मत बरसाओ
4. गायत्री परिवार
5. विश्वबंधुत्व
6. प्राण हमारे
7. तलवार फेंक दो
8. मंगलाचरण बनो
9. वसुधा-परिवार
10. सद्भावों के बिरवे
11. जहाँ से प्यार
12. विश्वशांति का आधार दायरे तोड़ दें
13. अपनत्व सभी में विश्व-परिवार
14. स्वर्ग बने संसार
15. परिजन जैसा प्यार
16. दिव्य वातावरण
17. जहर की नदी
18. नहीं प्रकृति का दोष
19. दिव्य चेतना-प्रवाह
20. महाकाल का संदेश
21. वातावरण-परिशोधन
22. देव-दक्षिणा
23. पर्यावरण - प्रदूषण
24. जादुई प्रभाव
25. वातावरण की महत्ता स्वर्ग का अवतरण
26. प्रकृति की सीख
27. सारी जगती है जन्म भूमि

Author pt shriram sharma acharya
Dimensions 20 cm x 27 cm
  • 03:31:PM
  • 29 May 2020




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