मर्यादा पुरषोत्तम राम-30

Author: pt shriram sharma acharya

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Preface

परमपूज्य गुरुदेव ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन के सभी पक्षों को स्पर्श करते हुए युग निर्माण अभियान के अन्तर्गत विचार क्रांति, नैतिक क्रांति, सामाजिक क्रान्ति की पृष्ठभूमि बनाने के लिए श्री रामचरित्र के माध्यम से लोक-शिक्षण पर अत्यधिक जोर दिया । प्रस्तुत वाड्मय में श्री राम के जीवन चरित्र के महत्वपूर्ण पक्षों को गुणों के आधार पर वर्गीकृत कर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है । कुछ चुनी हुई चौपाईयों से भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जीवन गाथा का सार यदि प्रकट हों जाता हो तो वह उद्देश्य पूरा हो जाता, जिसके लिए इसे लिखा गया था । जन-जन का जीवन आदर्शोन्मुख बने, पारिवारिक जीवन में आदर्श परम्पराएँ चल पड़े, इसके लिए श्री राम से बड़े लोकनायक और कौन हो सकतें हैं, यही विचार कर पूज्यपाद श्री गुरुदेव ने ग्रामीण प्रधान इस भारत की आत्मा में समाए श्रीराम को ही चुना एवं उन प्रसंगों व्याख्या दी, जो हमारे दैनन्दिन जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं । प्रत्येक प्रसंग के साथ उनने जीवन में उतारी जाने वाली शिक्षा भी दी । इसमें कोई संशय नहीं कि राम चरित्र पर लिखा गया हर ग्रन्थ एक नीति शास्त्र है, किन्तु यदि उसमें कथा-प्रसंग भी -स्थान पर जुड़े हों व युगानुकूल हों तो सरस, सुग्राह्य हो जाते हैं । रामायण का काव्य धार्मिक उपदेश एवं कथा का प्रवाह है, इन तीनों का सान्निध्य भरा सामंजस्य इस वाङ्मय में देखने को मिलता है ।

श्री रामचरित्र एक समुद्र की तरह से है, उसमें सभी कुछ मूल्यवान है, फिर भी आज की आवश्यकता के अनुरूप एवं उपयोगी उसमें ऐसा क्या हैं, जिसे साधारण से साधारण व्यक्ति भी उतारना चाहे तो, उतार सके, उसके लिए शोध कर ऋषि-मनीषा ने वे जीवन-प्रसंग हमारे सांस्कृतिक जीवन के आराध्य श्री राम का कथा में से लेकर इसमें प्रस्तुत किये हैं ।

Table of content

पारिवारिक जीवन का आदर्श पिता-पुत्र का आदर्श सम्बन्ध
प्रजा के हित में रहना
पंचम कक्षा नाम जप एवं दृढ़ विश्वास

Author pt shriram sharma acharya
Dimensions 20 cm x 27 cm
  • 03:55:AM
  • 17 Feb 2020




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