हारिए न हिम्मत

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Preface

दूसरे के छिद्र देखने से पहले अपने छिद्रों को टटोलो। किसी और की बुराई करने से पहले यह देख लो कि हम में तो कोई बुराई नहीं है। यदि हो तो पहले उसे दूर क रो। दूसरों की निन्दा करने में जितना समय देते हो उतना समय अपने आत्मोत्कर्ष में लगाओ। तब स्वयं इससे सहमत होंगे कि परनिंदा से बढऩे वाले द्वेष को त्याग कर परमानंद प्राप्ति की ओर बढ़ रहे हो।

संसार को जीतने की इच्छा करने वाले मनुष्यों! पहले अपने केा जीतने की चेष्टा करो। यदि तुम ऐसा कर सके तो एक दिन तुम्हारा विश्व विजेता बनने का स्वप्न पूरा होकर रहेगा। तुम अपने जितेंद्रिय रूप से संसार के सब प्राणियों को अपने संकेत पर चला सकोगे। संसार का कोई भी जीव तुम्हारा विरोधी नहीं रहेगा।

Table of content

1. आत्मविश्वास और अविरल अध्यवसाय
2. आध्यात्मिक चिंतन अनिवार्य
3. मानवमात्र को प्रेम करो
4. अंतरात्मा का सहारा पकड़ो
5. जीवन को यज्ञमय बनाओ
6. हँसते रहो, मुस्कराते रहो
7. आत्म समर्पण करो
8. मार्गदर्शन के लिए अपनी ही ओर देखो
9. अपने आपकी समालोचना करो
10. नम्रता, सरलता, साधुता, सहिष्णुता
11. अंतःकरण के धन को ढ़ूंढो
12. अकेला चलो
13. बोलिए कम, करिए अधिक
14. प्रेम एक महान शक्ति
15. असफलताओं का कारण
16. दुःखद स्मृतियों को भूलो
17. सुख- दु:खों के ऊपर स्वामित्व
18. पौरूष की पुकार
19. पुरूषार्थ की शक्ति
20. भटकना मत
21. लगन और श्रम का महत्व
22. चिंतन और चरित्र का समन्वय
23. आत्मशक्ति पर विश्वास रखो
24. आत्मविश्वास जागृत करो
25. खिलाड़ी भावना अपनाओ
26. संतोष भरा जीवन जीयेंगे
27. विचार और कार्य संतुलित करो
28. दूसरों पर आश्रित न हों
29. धर्म का सार तत्व
30. भटकना मत
31. आप अपने मित्र भी हो और शत्रु भी

Page Length 31
  • 04:06:AM
  • 17 Feb 2020




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