गायत्री की दैनिक विशिष्ठ साधना-12

Author: Brahmavarchasv

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Preface

गायत्री उपासना हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य बतायी गयी है एवं यह कहा गया है कि न केवल यह सिद्धियों को जगाती है, वरन् हमारे दैनन्दिन जीवन के कषाय-कल्मषों कों हटाने, आत्मसत्ता को स्वच्छ करने के लिए, यह नितान्त अनिवार्य है । गायत्री को कामधेनु कहा गया है अर्थात् इस महाशक्ति की जो देवता, दिव्य स्वभाव वाला मनुष्य उपासना करता है, वह माता के स्तनों के समान आध्यात्मिक दुग्ध-धारा का पान कर अनन्त आनन्द को पाता है । इसके बाद उसके जीवन में कोई अभाव नहीं रह जाता । उसके सभी कष्ट मिट जाते हैं एवं पाप-प्रारब्ध कट जाते हैं ।

प्राचीन काल का इतिहास हम खोजते हैं तो पाते हैं कि सभी ऋषियों-मुनिजनों, अवतारी सत्ताओं की उपासना का मूल आधार गायत्री ही रहा है । गायत्री साधना से सतोगुणी सिद्धियों व्यक्ति को मिलती हैं एवं उसका जीवन संवेदना-समर्थता-कुशलता-संपन्नता इन चतुर्दिक शक्तियों से ओतप्रोत हो जाता है । गायत्री त्रिगुणात्मक है । इसकी उपासना से जहाँ सतोगुण बढ़ता है, वहीं कल्याणकारी उपयोगी रजोगुण की भी अभिवृद्धि होती है । इस रजोगुणी आत्मबल के संवर्धन से अनेकानेक प्रसुप्त पड़ी शक्तियाँ जाग्रत होती हैं जो सांसारिक जीवन के संघर्ष में अनुकूल प्रतिक्रिया उत्पन्न कर व्यक्ति को जीवन समर में विजयी बनाती हैं । गायत्री साधक कभी अभावग्रस्त व दीन हीन नहीं रह सकता, यह परमपूज्य गुरुदेव ने अपने अनुभवों व साधना की सिद्धि के माध्यम से वाड्मय के इस खण्ड में लिखा है।

गायत्री सर्वतोमुखी समर्थता की अधिष्ठात्री है । इसकी साधना कभी किसी को हानि नहीं पहुँचाती ।

Table of content

1. आद्यशक्ति गायत्री की सिद्धिदायक समर्थ साधनायें
2. गायत्री सर्वतोमुखी समर्थता की अधिष्ठात्री
3. उच्चस्तरीय साधना के दो सोपान -
4. गायत्री पुरश्चरण
5. गायत्री की दिव्य शक्ति
6. आत्मिक प्रगति हेतु प्रज्ञा याग की साधना
7. नित्य - कर्म
8. शक्तिपीठों में मातृशक्ति की पूजा-अर्चा का विधि-विधान

Author Brahmavarchasv
Publication Akhand Jyoti Santahan, Mathura
Publisher Janjagran Press, Mathura
Dimensions 205X277X20 mm
  • 03:53:AM
  • 17 Feb 2020




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