सावित्री, कुण्डलिनी एवं तंत्र -15

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

Web ID: 269

`150 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

परमपूज्य गुरुदेव ने गायत्री-साधना के साथ-साथ सावित्री-साधना, सूर्य देवता की विशिष्ट उच्चस्तरीय साधना को स्वयं अपने जीवन में विशेष उद्देश्यों के निमित्त संपन्न किया था । उनकी साधनावधि से एक बहुत बड़े भाग को गुह्य माना जा सकता है । चौबीस-चौबीस लक्ष के चौबीस अनुष्ठानों के साथ-साथ भी उनकी सौरशक्ति के संदोहन वाली विशिष्ट साधना चलती रही । १९५८ का सहस्रकुंडीय यज्ञ इसी दिशा में एक विशेष प्रयोग था, जो सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । परमपूज्य गुरुदेव ने प्राणाग्नि, कुंडलिनी, अंदर प्रसुप्त पड़ी सर्पिणी पर यों तो पहले भी समय-समय पर लिखा पर विस्तार से इसकी जानकारी सुधी पाठकों को अपने ११६०-६१ के हिमालय प्रवास से लौट कर ही देना आरंभ की, वह भी क्रमश: छोटे-छोटे सूत्रों के रूप में ।

सावित्री-साधना एवं कुंडलिनी महाशक्ति का जागरण एवं उसकी संसिद्धि एक विशिष्ट स्तर का पुरुषार्थ है, जिसे पूज्यवर जीवन-भर औरों को लाभ पहुँचाने के लिए करते रहे किंतु सूक्ष्मीकरण के माध्यम से यह प्रयोग और सघनतम एवं विराटतम रूप में ११८४- ८५ में संपन्न किया गया । वाड्मय के प्रस्तुत खंड में इसी साधना के स्वरूप सत्परिणामों की परिजनों को जानकारी करायी गई है । कुंडलिनी महाशक्ति के विषय में संव्याप्त भ्रांतियों का निवारण कर इस ज्ञान के महासागर पर छाए कुहासे को मिटाकर पूज्यवर ने साधना का एक द्वार खोल दिया, जो विशिष्ट उद्देश्यों के लिए आत्मबलसंपन्न साधकों द्वारा ही प्रयुक्त होना चाहिए ।

कुंडलिनी जागरण का अर्थ है अपने अंदर छिपे पड़े प्राणशक्ति के भांडागार का गायत्री महामंत्र की साधना के माध्यम से स्फोट प्रक्रिया द्वारा रहस्योद्घाटन आत्मकल्याण एवं लोक-कल्याण के निमित्त ।

Table of content

• गायत्री और सावित्री-एक ही महाशक्ति के दो रुप
• सावित्री का शक्तिस्त्रोत-सावित्री देवता
• सूर्योपासना का ज्ञान-विज्ञान
• षट्चकों का स्वरुप और रहस्य
• कुण्डलिनी जागरण की ध्यान साधनायें
• सावित्री विज्ञान और तंत्र साधना

Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Publication Akhand Jyoti Santahan, Mathura
Publisher Janjagran Press, Mathura
Dimensions 205X273X25 mm
  • 05:04:PM
  • 20 Oct 2019




Write Your Review



Relative Products