प्रज्ञा पुराण-2

Author: pt Shriram sharma acharya

Web ID: 259

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Preface

लोक शिक्षण के लिए गोष्ठियों-समारोहों में प्रवचनों-वत्कृताओं की आवश्यकता पड़ती है । उन्हें दार्शनिक पृष्ठभूमि पर कहना ही नहीं, सुनना-समझना भी कठिन पड़ता है । फिर उनका भण्डार जल्दी ही चुक जाने पर वक्ता को पलायन करना पड़ता है । उनकी कठिनाई का समाधान इस ग्रन्थ से ही हो सकता है । विवेचनों, प्रसंगों के साथ कथानकों का समन्वय करते चलने पर वक्ता के पास इतनी बड़ी निधि हो जाती है कि उसे महीनों कहता रहे । न कहने वाले पर भार पड़े, न सुनने वाले ऊबें । इस दृष्टि से युग सृजेताओं के लिए लोक शिक्षण का एक उपयुक्त आधार उपलब्ध होता है । प्रज्ञा पीठों और प्रज्ञा संस्थानों में तो ऐसे कथा प्रसंग नियमित रूप से चलने ही चाहिए । ऐसे आयोजन एक स्थान पर या मुहल्ले में अदल-बदल के भी किए जा सकते है ताकि युग सन्देश को अधिकाधिक निकटवर्ती स्थान पर जाकर सरलतापूर्वक सुन सकें । ऐसे ही विचार इस सृजन के साथ-साथ मन में उठते रहे है, जिन्हें पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत कर दिया गया है ।

Table of content

प्राक्कथन
प्रथम अध्याय- देवमानव-समीक्षा प्रकरण
द्वितीय अध्यायं- धर्म-विवेचन प्रकरण
तृतीय अध्याय- सत्य-विवेक प्रकरण
चतुर्थ अध्याय- संयमशीलता कर्तव्यपरायणता प्रकरण
पंचम अध्याय- अनुशासन- अनुबंध प्रकरण
षष्ठ अध्याय- सौजन्य-पराक्रम प्रकरण
सप्तम अध्याय- सहकार-परमार्थ प्रकरण
वंदना परिशिष्ट

Author pt Shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 268
Dimensions 18.5X24.2 cm
  • 05:11:AM
  • 23 Jan 2020




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