सार्थक एवं आंनन्दमय वृद्धावस्था

Author: brahmavarchas

Web ID: 246

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Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

आप यदि आयु के पचास वर्ष पार करने जा रहे हैं, तो इस पुस्तक का अध्ययन अवश्य करें । इस पर चिंतन-मनन से आपके भविष्य के जीवन की सार्थकता सुनिश्चित हो सकेगी ।

यदि आप अभी युवावस्था में ही हैं, गृहस्थ हैं, विद्यार्थी हैं, तब तो यह पुस्तक और अधिक उपयोगी सिद्ध होगी । वर्तमान जीवनचर्या में, आचार-विचार में, चिंतन और चरित्र में यदि किसी प्रकार की त्रुटि है, तो उसे दूर कर सकेंगे । भविष्य की समुचित तैयारी कर सकेंगे । अपने साथ-साथ परिवार एवं समाज का भी कल्याण कर सकेंगे ।

यदि आप एक समाज सेवक हैं, तब तो आपका दायित्व और भी अधिक बढ़ जाता है । समाज के अन्य विचारशील परिजनों को संगठित करके वृद्धजनों के कल्याण हेतु रचनात्मक पहल करने में यह पुस्तक बहुत ही सहायक होगी ।

वृद्धावस्था भगवान् का एक वरदान है । इसकी गरिमा को समझें एवं इसे उपयोगी और आनंदमय बनाएं ।

Table of content

• वृद्ध कौन?
• वृद्धजन एवं उनकी समस्याएँ
• वृद्धजन क्या करें?
• परिवार एवं युवावर्ग का दायित्व
• समाज का दायित्व
• स्वस्थ रहें, व्यस्त रहें, मस्त रहें
• वृद्धावस्था को जीवन का स्वर्णिम अवसर सिद्ध करें


Author brahmavarchas
Edition 2011
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 40
Dimensions 111X182X2 mm
  • 11:35:PM
  • 1 Apr 2020




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