विवाहोन्माद के लिए बुद्धि बेच क्यो दी जाय?

Author: Pt. shriram sharma

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Preface

किसी जीवित समाज सजीव राष्ट्र को यह रीति-नीति अपनानी पड़ती है कि वह अपनी आतंरिक दुर्बलताओं को समझे उन्हें सुधारने का साहसपूर्वक प्रयत्न करे। जिनमे यह प्रवृति विकसित नहीं हुई जिन्हें ढर्रे का जीवन जीवन जीते रहने की आदत है, वे पिछड़ जाते हैं। समय उन्हें पीछे छोड़कर बहुत आगे बढ़ जाता है और उन्हें अपनी भूल पर पछताते रहना पड़ता है।
परिस्थितियों का सुधारना बिगड़ना विचारों के उतकृष्ट-निकृष्ट होने पर निर्भर है, मनुष्य की 90 प्रतिशत शक्ति उसके भीतर अचेतन में पड़ी रहती है। आदमी जैसा सोचता है वैसी ही उसकी चेष्टाएँ होती हैं और वैसी साधन सामग्री मिल जाती है और वैसी ही परिस्थितयां बन जाती हैं।

Table of content

1. विवेकशीलता आवश्यक
2. आतंरिक दुर्बलताओं को समझें
3. कुरीतियों को अंध-परम्पराओं का बाहुल्य
4. सरल और सादा विवाहोत्सव
5. उसे उपयोगी कार्यों में लगावें
6. आडम्बर क्यों पूजा जाय
7. निरर्थक भ्रम जाल
8. बड़ी दावत महंगी ज्यौनार
9. अहंकार और आडम्बर का छिछोरापन
10. सादगी क्यों न अपनायें
11. जान नेतृत्व कर सकने वाले शूरवीर
12. अवसर न चूका जाय
13. बड़प्पन बड़े कामों से मिलता है
14. आगे कदम कौन बढ़ावे
15. समर्थ लोग अधिक संयम कर लें
Author Pt. shriram sharma
Edition 2014
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 24
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 09:50:PM
  • 17 Feb 2020




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