उपासना का तत्वदर्शन और स्वरूप

Author: Pt. Shriram Sharma Acharya

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Preface

परमात्मा समस्त सत्प्रवृत्तियों एवं अनंत शक्तियों का केंद्र है। जीव विभु बनना चाहता है तो उसे अपने सामने एक आदर्श उपस्थित रखना होगा। जो परमात्मा का सच्चे मन से जितना-जितना चिंतन करता है, वह उसी अनुपात से परमात्मा के रूप में बदलता जाता है। जीवन का लक्ष्य आत्मोत्कर्ष है, उसकी पूर्ती में परमात्मा का स्मरण-चिंतन एवं भजन पूजन आवश्यक सम्बल सिद्द होता है।

प्रार्थना के माध्यम से हम विश्वव्यापी महानता के साथ अपना घनिष्ट संपर्क स्थापित करते हैं। आदर्शों को भगवान की दिव्य अभिव्यक्ति के रूप में अनुभव करते हैं और उसके साथ जुड़ जाने की विह्वलता को सजग करते हैं।

Table of content

1. उपासना प्रार्थना को दैनिक जीवन में स्थान मिले
2. सच्ची उपासना का स्वरुप
3. हे परमप्रभु हमें पवित्र बना दो
4. सही प्रार्थना-उपासना से सुनिश्चित सत्परिणाम
Author Pt. Shriram Sharma Acharya
Edition 2010
Publication Yug Nirman Yojana Vistar trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojana Press, Mathura
Page Length 56
Dimensions 12X18 cm
  • 04:09:PM
  • 25 Jun 2021




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