लोकसेवियों के लिए दिशाबोध

Author: Pt shriram sharma acharya

Web ID: 1313

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Preface

लोक सेवियों को कैसा होना चाहिए, कैसा उनका आचरण होना चाहिए, ताकि वे आदर्श लोकनायक बन सकें, यह परम पूज्य गुरुदेव अपनी लेखनी के माध्यम से अपने जीवन काल में ही गए इस सन्दर्भ में उनके निर्देश अखंड ज्योति के अपनों से अपनी बात स्तम्भ में तथा अलग से लिखे गए आलेखों के रूप में कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शनार्थ छपते रहे हैं

परमपूज्य गुरुदेव द्वारा लिखी उस सामग्री को यहाँ पर आत्मीय परिजनों के आग्रहवश पुस्तकाकार में पुनः प्रकाशित किया जा रहा है, ताकि मिशन के परिजन परम पूज्य गुरुदेव के विचारानुकूल अपने जीवन को लोकसेवी के व्यवाहरिक स्वरूप की कसौटियों पर खरे उतारने के लिए, तैयारी कर सकें

Table of content

1. विदाई की घड़ियों में उभरी
2. पूज्य गुरुदेव की भाव संवेदना
3. अपने अंग अवयवों से
4. प्रज्ञा परिजनों के सप्त महाव्रत
5. युग शिल्पी अहमन्यता के विषपान से बचे रहें
6. अध्यात्म क्षेत्र की वरिष्ठता विनम्रता पर निर्भर
7. लोकसेवी का दृष्टिकोण कैसा हो ?
8. साधना समर के लिए समर्थ बनें सृजन सैनिक
9. लोकसेवी की प्रामाणिकता व्यक्तित्व के स्तर पर निर्भर
10. सेवा धर्म के मार्ग में बाधाएँ और भटकाव
11. लोकसेवी की जीवन नीति
12. लोकसेवी का आचरण और व्यवहार
13. लोकसेवी का लोक व्यवहार कैसा हो ?
14. प्रज्ञा परिजनों के लिए सात प्रतिबन्ध

Author Pt shriram sharma acharya
Edition 2014
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 76
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 12:49:AM
  • 6 Jun 2020




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