युग गायन भाग - ३

Author: Pt Shriram sharma acharya

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Preface

परम पूज्य गुरुदेव ने जन जागरण में कथा शैली, काव्य एवं युग संगीत के अचूक प्रभाव को स्वीकारते हुए वर्तमान में उस विद्या के विकृत स्वरूप को संस्कृति- थाती एवं व्यक्ति, परिवार, समाज को पतनोत्मुख बनाने का दूषित प्रयास मानते हुए इस विद्या के परिष्कृत स्वरूप भजनोपदेशक युग संगीत को प्रस्तुत कर जनमानस एवं विशेषतः नयी पीढ़ी को नयी दिशा प्रदान करने वाले गीत- संगीत का अभूतपूर्व प्रयास किया है।

गायत्री परिवार के गीत- कविता द्वारा जन आन्दोलन के लिए कुछ योजनाएँ संगीत प्रशिक्षण विभाग द्वारा प्रयोग प्रचार एवं प्रसार हेतु प्रस्तुत है।

Table of content

• संस्कृति की वेदना
• दृष्टिकोण- परिवर्तन
• उत्सर्ग- कामना
• विश्व- विख्यात प्रतिभा
• पुरुषार्थ की कहानी
• मानव- जीवन
• विश्व- उद्यान भारत
• आत्मनिर्माण आवश्यक
• प्रभुमय जीवन
• श्रद्धा- स्रोत भक्ति
• इनसान की खोज
• धरती का इनसान
• कंगाल राजकुमार
• इनसान की पहचान
• परमेश्वर से दूरी
• नई पीढ़ी का संकल्प
• ईश्वर- प्रेम का आधार
• हमारा सौभाग्य
• शांति- स्रोत अध्यात्म
• पुनीत कामना
• प्रत्येक आँसू अनमोल
• जन- कल्याण करो
• विवेक का संकेत
• नादानी
• शाश्वत सौंदर्य
• सबै भूमि गोपाल की
• मानव- जीवन महान
• व्यक्तित्व- परिष्कार
• प्रत्येक क्षण महत्त्वपूर्ण
• बेकार जीवन
• निरर्थकता
• प्रत्यक्ष देवता
• प्यार की अजेय शक्ति
• मार्ग- दर्शक इनसान
• दिया मत बुझाओ
• अध्यात्म का संदेश
• युग- वेदना का उपचार
• सद्बुद्धि की शक्ति
• पवित्र जीवन
• फूल- सा जीवन
• एकला चलो
• करुणा का स्रोत
• मन के द्वार पर दस्तक
• भटकाव




Author Pt Shriram sharma acharya
Edition 2011
Publication Yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 48
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 06:41:PM
  • 26 May 2020




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