गायत्री मंत्र की अदभुत सामर्थ्य

Author: Pt. Shriram sharma

Web ID: 1221

`12
`14
Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

युगऋषि का परोक्ष जीवन जितना गूढ़- रहस्यमय रहा, उनका प्रत्यक्ष जीवन उतना ही स्पष्ट एवं पारदर्शी रहा ।। उन्होंने अपने समय का क्षण- क्षण तथा पुरुषार्थ का कण- कण ईश्वरीय योजना युगनिर्माण योजना को प्रत्यक्ष जगत में प्रतिष्ठित- फलित करने के लिए ही समर्पित किया ।।

दुर्बुद्धि के विनाशकारी कुचक्र को काटने के लिए उन्होंने गायत्री महामंत्र, गायत्री महाविद्या को सुगम बनाकर सबके लिए उसके द्वार खोल दिये ।। उनका जीवन गायत्री महाविद्या की सामर्थ्य का प्रत्यक्ष प्रमाण रहा है ।। इसीलिए विज्ञजनों ने उन्हें युग के विश्वामित्र का गरिमामय सम्बोधन भी दिया ।। महात्मा आनंद ने उन्हें गायत्रीमय और स्वामी करपात्री जी ने उन्हें इस युग में गायत्री महाविद्या का जनक कहकर अपने भाव व्यक्त किये ।।

उन्होंने गायत्री महाविद्या पर गायत्री महाविज्ञान सहित भारी मात्रा में लिखा है, किन्तु उनकी वाणी की अभिव्यक्ति का क्रम अपने ढंग का अनोखा ही था ।। लेखन की उनकी भाषा मजी हुई साहित्य भाषा है, किन्तु भाषण में वे जन भाषा का ही उपयोग करते रहे ।। इसलिए उनके भाषण जन साधारण के मन मानस में अधिक सहजता से प्रवेश कर जाते हैं ।।

गायत्री विषयक यह प्रवचन उन्होंने सन् १९८१ के आसपास दिया था ।। दृष्टान्त आदि उसी कालखण्ड के अनुरूप हैं ।। परिजन इसके अध्ययन से स्वयं भी लाभान्वित हो सकते हैं तथा अपने मित्रों, परिचितों को भी लाभान्वित कर सकते हैं ।। विशेष अवसरों अथवा सहज संपर्क के क्रम में इसे भेंट- उपहार रूप में देने का क्रम भी बहुत सार्थक सिद्ध हो सकता है ।।

Table of content

1. संस्कृति का उद्गम गायत्री
2. ज्ञान विज्ञान की जननी
3. मंत्र का विराट विस्तार
4. अद्भुत जीवन विज्ञान
5. जीवन के मूल सूत्रों का आधार
6. स्वरूप की गरिमा समझें
7. कर्मकांड के साथ तत्वज्ञान भी समझें
8. सब कुछ मिल सकता है इससे
9. दो आध्यात्मिक लाभ
10. स्वयं के जीवन की गवाही

Author Pt. Shriram sharma
Publication Yug Nirman Yogana, Mathura
Publisher Yug Nirman Yogana, Mathura
Page Length 64
Dimensions 12X18 cm
  • 05:42:PM
  • 8 Aug 2020




Write Your Review



Relative Products