सिद्धिदायक साधनाओं प्रशिक्षित प्रयोग

Author: Bhagwati Devi Sharma

Web ID: 1216

`4 Add to cart

Availability: In stock

Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

गायत्री को भारतीय संस्कृति की जननी और यज्ञ को भारतीय धर्म का पिता माना जाता है ।। गायत्री का संदेश है- सद्विचार, विवेक, सद्भावना, आध्यात्मिक उच्चस्तर, मानवता के आदर्शों की अभिव्यक्ति ।। यज्ञ का तत्त्वज्ञान है- त्याग, सत्कर्म, सदाचार, संयम, सेवा, सामूहिकता, सहिष्णुता, सहयोग, स्नेह, उदारता, श्रमशीलता, तितिक्षा ।। गायत्री हमें मानसिक दृष्टि से महान बनने की प्रेरणा देती है और यज्ञ की शिक्षा सांसारिक दृष्टि से आदर्शवादी, धर्मनिष्ठ, कर्तव्यपरायण महापुरुष बनने की है ।।

गायत्री और यज्ञ की उपासना को धर्म- कर्मों में प्राथमिक स्थान देकर ऋषियों ने मानवता के आदर्शों में मनुष्य को लगाए रखने का प्रयत्न किया है ।। यों गायत्री और यज्ञ के असंख्यों वैज्ञानिक लाभ हैं, इनके द्वारा अनेक समस्याओं को सुलझाने का भारी उपयोग भी है ।। पर यहाँ इस पुस्तक में इस दृष्टिकोण से विचार करेंगे कि गायत्री यज्ञ की धर्म प्रवृत्ति को एक आंदोलन का रूप देकर हम किस प्रकार नैतिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की ओर अग्रसर हो सकते हैं ।।

Table of content

1. गायत्री एक सार्वभौम दर्शन
2. देव संस्कृति की अधिष्ठात्री गायत्री
3. उपासना पद्धति
4. अग्निहोत्र-गायत्री साधना का अनिवार्य अंग
5. यज्ञ और उसका दर्शन
6. यज्ञ से शिक्षण
7. यज्ञ प्रक्रिया
8. यज्ञपैथी-एक समग्र उपचार प्रक्रिया
9. प्रसुप्त का जागरण योग प्रक्रिया से

Author Bhagwati Devi Sharma
Publication Yug Nirman Yogana, Mathura
Publisher Yug Nirman Yogana, Mathura
Page Length 24
Dimensions 12X18 cm
  • 04:30:PM
  • 11 May 2021




Write Your Review



Relative Products