पूज्य गुरुदेव के मार्मिक संस्मरण

Author: Pt. Lilapat Sharma

Web ID: 1189

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Preface

हमारे जीवन का अनुपम सौभाग्य और संयोग ही कहा जाना चाहिए कि हमें एक अवतारी चेतना का गुरु सत्ता के रूप में सान्निध्य, संरक्ष्ण मिला । परम पूज्य गुरुदेव के दृश्य जीवन के पटाक्षेप के बाद कई परिजनों ने हमसे आग्रह किया कि पूज्यवर के जीवन तथा अपने जीवन के उन महत्वपूर्ण प्रेरणाप्रद प्रसंगों को उजागर करें जिनसे जन-जन भी शिक्ष्ण पाकर लोक सेवा के प्रगति पथ पर अग्रसर हो सके । सबकी जिज्ञासाएँ पूर्ण हों । परम पूज्य गुरुदेव की लिखी पुस्तक "हमारी वसीयत और विरासत" आज जिज्ञासुओं के लिए प्रकाश स्तम्भ का कार्य कर रही है । पूज्यवर ने जो उपलब्धियाँ पाईं उसके पीछे कितनी तप तितिक्षा और परिश्रम किया यह सब जानने समझने के लिए वह पुस्तक समीचीन है, परन्तु उनके साथ रहने पर हम अनुचरों ने जो कुछ सीखा, जिस जिस रूप में उनको देखा, उसे जानने की उत्सुकता हर परिजन में दिखाई दे रही है । परिजनों का आग्रह हम लंबे समय से टालते रहे हैं । आखिरकार हम उन जीवन सूत्रों को प्रकट कर देना ही चाहते हैं जिनके बलबूते हम आज इस स्थिति में हैं । प्रज्ञावतार हमारे गुरुदेव नामक पुस्तक में हमने पूज्यवर के जीवनवृत्त से जुड़े प्रसंगों को लिया है।

Table of content

1. पूज्य गुरुदेव के प्रथम दर्शन
2. पुत्र की आयु बढा़ई
3. वंदनीया माताजी के प्रथम दर्शन
4. कामधेनु का दूध
5. सन १९५८ का महायज्ञ
6. साक्षात् कृष्ण के दर्शन
7. प्रगतिशील जातीय सम्मेलन
8. सन्यासी की स्वाद यात्रा
9. उपजातीय बंधन तोडा़
10. गरीब-अमीर का बंधन तोडा़
11. वेदों का प्रचार-प्रसार
12. गुरुदेव एक सच्चे ब्राह्मण
13. अखंड़ दीप एवं मिशन का कार्य
14. गुरुदेव हमे लेने ग्वालियर पधारे
15. गायत्री तपोभूमि में शिविर प्रारंभ हुए

Author Pt. Lilapat Sharma
Publication Yug Nirman Yogana, Mathura
Publisher Yug Nirman Yogana, Mathura
Page Length 184
Dimensions 12X18 cm
  • 05:55:AM
  • 2 Dec 2020




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