शक्तिपीठ संदर्शिका

Author: Brahmavarchasva

Web ID: 1187

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Preface

परम पूज्य गुरुदेव हिमालय की ऋषि सत्ताओं के प्रतिनिधि के रूप में इस धराधाम पर विशेष उद्देश्य को लेकर अवतरित हुए । उन्होंने ने अपने ८० वर्ष के स्थूल जीवन में ही इतने कार्य कर दिये कि उनका लेखा-जोखा करना संभव नहीं है । उनकी एक स्थापना ऐसी है जो युगों-युगों तक याद की जाती रहेगी, वह है युग शक्ति के रूप में गायत्री माता की उपासना का सार्वभौम प्रचलन तथा उसके श्रद्धा केन्द्रों के रूप में गायत्री शक्तिपीठों की स्थापना । इन पीठों के सम्बन्ध में उन्होंने अपने विशाल परिवार के सदस्यों से बड़ी अपेक्षाएँ की हैं । इन्हें जन-जागरण के केन्द्र, नये सिरे से मानवता की गढ़ाई के स्थान तथा समाज के प्रकाश स्तम्भ के रूप में विकसित करने का महान दायित्व परिजनों को सौंपा है ।

धर्म संस्थानों के प्रति जनता की जो अपेक्षा है उसमें वे खरे उतरे, सामाजिक हित की समस्त गतिविधियाँ यथा- साधना, शिक्षा, स्वास्थ्य; स्वावलम्बन, पर्यावरण, नारी जागरण, कुरीति उन्मूलन-नशा निवारण आदि के बारे में उपयुक्त व्यवस्था बने । अनुभव किया गया है कि अधिकांश प्रज्ञा संस्थानों के परिजनों, संचालकों, ट्रस्टियों को इस सम्बन्ध में या तो कोई विशेष रुचि नहीं है अथवा उन्हें शक्तिपीठों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है । शक्तिपीठों के निर्माण के पीछे ऋषियुग्म का क्या उद्देश्य है ? कैसे-क्या करना है ? जानकारी के अभाव में अथवा उत्साह हीनता उदासीनता के कारण हमारे अधिकांश प्रज्ञा संस्थान वर्तमान में पिछड़ी हुई स्थिति में हैं ।


Table of content

अध्याय १ (अ) शक्तिपीठों, प्रज्ञापीठों की स्थापना- आवश्यकता महत्त्व एवं लक्ष्य तथा उद्देश्य
(ब) शक्तिपीठ, प्रज्ञापीठ का मूल प्रारूप
अध्याय २ प्रज्ञा संस्थान की जीवंतता के लिए अनिवार्य प्रवृत्तियाँ
अध्याय ३ प्रज्ञा संस्थानों की आंतरिक एवं बाह्य व्यवस्थाओं के सुसंचालन हेतु समितियों- उपसमितियों
का गठन/पुनर्गठन
अध्याय ४ (अ) प्रज्ञा संस्थानों की कार्यालयीन व्यवस्था
(ब) समयदान नियोजन क्यो? कहाँ और कैसे
(ब) प्रज्ञा संस्थान विवरण पत्रक
अध्याय ५ (अ) शक्तिपीठ और संगठन में आपसी सहयोग एवं समन्वय
(ब) संगठन की सभी इकाइयों का शक्तिपीठों प्रज्ञापीठों से आपसी तालमेल
अध्याय ६ शक्तिपीठों में सम्पन्न कराये जाने वाले आदर्श विवाहों के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण बिन्दु
अध्याय ७ शक्तिपीठ परिव्राजकों के दायित्व एवं दिशाबोध
अध्याय ८ (अ) युग ऋषि के जीवन क्रम के महत्त्वपूर्ण सोपान
(ब) परम वन्दनीया माताजी की संक्षिप्त जीवन यात्रा
(स) विराट- प्रज्ञा पुरुष प. पू गुरुदेव की पाँच स्थापनाएँ
(द) परम पूज्य गुरुदेव द्वारा स्थापित युग धर्म के दस लक्षण
(य) वेदमूर्ति पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा रचित युग निर्माण के चयनित सद्वाक्य
अध्याय ९ स्कुट प्रकरण :: -मंत्रोच्चार के सामान्य नियम
(क) शक्तिपीठों में दैनिक पूजा क्रम
(ख) देव स्थापना
(ग) वेद स्थापना
(घ) भूमि पूजन प्रकरण
(ड) गृह प्रवेश- वास्तु शांति प्रकरण
(च) विश्वकर्मा पूजा का प्रारूप
(छ) वाहन पूजन (ज) गोदान संकल्प
(झ) एकादशीव्रत उद्यापन मंत्र
(न) पुरुष- सूक्त
(ट) स्फुट मंत्र
Author Brahmavarchasva
Publication Shree Vedmata Gayatri Trust (TMD)
Publisher Shree Vedmata Gayatri Trust (TMD)
Page Length 180
Dimensions 14 X 22 cm
  • 12:42:AM
  • 6 Jun 2020




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