आन्तरिक उल्लास का विकास

Author: Pt. shriram sharma

Web ID: 1176

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Condition: New

Brand: AWGP Store

Preface

प्रसन्नता, आनंद और संतोष की प्राप्ति के लिए लोग संसार को छान डालते हैं, इधर-उधर मारे-मारे फिरते हैं, वस्तुओं के संग्रह की धूम मचा देते हैं तथा अनेक प्रकार की चेष्टाएँ करते हैं, इतने पर भी अभीष्ट वस्तु प्राप्त नहीं होती । सारे कष्ट साध्य प्रयास निरर्थक चले जाते हैं, मनुष्य प्यासे का प्यासा रह जाता है ।

कारण यह है कि उल्लास का उद्गम अपनी आत्मा है, संसार की किसी वस्तु में वह उपलब्ध नहीं हो सकता । जब तक यह तथ्य समझ में नहीं आता, तब तक बालू से तेल निकालने की तरह आनंद प्राप्ति के प्रयास निष्फल ही रहते हैं । जब हम यह समझ लेते हैं कि आनंद का स्रोत अपने अंदर है और उसे अपने अंदर से ही ढूँढ निकालना होगा, तब सीधा रास्ता मिल जाता है ।

आंतरिक सद्वृत्तियों को विकसित करके आंतरिक उल्लास को किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है ? बिना भौतिक वस्तुओं का संचय किए किस प्रकार हम हर घड़ी आनंद में सरावोर रह सकते हैं ? यह तथ्य इस पुस्तक में बताया गया है । आशा है कि पाठक इससे लाभ उठावेगे ।


Table of content

• प्रेम का अमृत छिड़क कर शुष्क जीवन को सजीव बनाइये
• त्याग और सेवा द्वारा सच्चे प्रेम का प्रमाण दीजिये
• अपने सद्गुणों को प्रकाश में लाइए
• प्रसंसा का स्वाद चखिए और दूसरों को चखाइये


Author Pt. shriram sharma
Publication yug nirman yojana press
Publisher Yug Nirman Yojana Vistara Trust
Page Length 40
Dimensions 12 cm x 18 cm
  • 01:02:AM
  • 6 Jun 2020




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