मंत्र सुमन

Author: Brahmavarchasva

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Preface

शब्द ब्रह्म- नाद ब्रह्म की विधा भारतीय अध्यात्म की एक महत्त्वपूर्ण धारा रही है ।। मनन करने से जो त्राण करे उसे ही “मन्त्र” कहा है ।। मन्त्र विद्या का विस्तार असीम है ।। उसमें अनेक शब्द गुच्छक है ।। उनके जप तथा सिद्धिपरक अनेकानेक योगाभ्यास व कर्मकाण्ड हैं किन्तु उन सबके मूल में एक ही ध्वनि आती है- ओंकार ।। यही शब्द ब्रह्म- नाद ब्रह्म की धुरी है ।। ओंकार के विराट ब्रह्माण्ड में गुज्जन से ही सृष्टि की उत्पत्ति हुई है, नाद या शब्द की उत्पत्ति व ताप, प्रकाश आदि शक्तियों का आविर्भाव उसके बाद होता चला गया ।। इस प्रकार सृष्टि का मूल- इस निखिल ब्रह्माण्ड में संव्याप्त ब्राह्मी चेतना की धुरी यदि कोई है तो वह शब्द का नाद ही है ।। यहाँ तक कि परमात्मा तक पहुँचने के मार्ग का द्वार भी शब्द ब्रह्म ही है ।।

Table of content

1. मन्त्र-अर्थ एवं स्वरूप महिमा
2. मन्त्रयोग
3. मन्त्रों का वर्गीकरण
4. मन्त्र-विनियोग
5. मन्त्र जाप विधि
6. वैज्ञानिक तथ्य
7. गायत्री मन्त्र
8. गणेश मन्त्र
9. स्वस्ति मन्त्र
10. शुभकामना मन्त्र
11. योग स्तुति
12. दीप मन्त्र
13. सद्गुरु आवाहन मन्त्र
14. सरस्वती मन्त्र
15. सविता उपासना मन्त्र
16. सूर्य अर्ध्यदान मन्त्र
17. सूर्य नमस्कार मन्त्र
18. गायत्री स्तवन
19. भगवती स्तुति

Author Brahmavarchasva
Publication Shree Vedmata Gayatri Trust (TMD)
Page Length 148
Dimensions 14 X 22 cm
  • 02:14:AM
  • 13 Jun 2021




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