गायत्री महाविज्ञान भाग - ३

Author: Pt. Shriram Sharma Aacharya

Web ID: 1166

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Preface

गायत्री के पाँच मुख और दस भुजा होने का वर्णन अनेक जगह आता हे ।। ऐसी अनेक तस्वीरें एवं मूर्तियाँ भी मिलती हैं ।। यह अनेक मुख और अनेक भुजाऐं साधारण पाठकों के लिए एक पहेली हैं जिसे न सुलझा सकने पर वे गायत्री विद्या जैसे सुदृढ़ विज्ञान को साम्प्रदायिक कथा- गाथाओं की श्रेणी में रख देते हैं और उसके महत्त्व की गम्भीरता में सन्देह करने लगते हैं ।।

इस पुस्तक की रचना उस गुत्थी को सुलझाने के लिए की गई है ।। गायत्री के पाँच मुख आत्मा के पाँच कोश आवरण हैं ।। अग्निमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश, आनन्दमय कोश- यह पाँच आत्मा के आवागमन के कैद तथा छुटकारे के वैसे ही द्वार हैं जैसे कि मनुष्य के शरीर में साँस आने- जाने के लिए नाक में छिद्र होते हैं ।। पाँच मुखों के चित्रण में योग- विद्या का वह गुप्त विज्ञान ओर विधान दिया हुआ हे जिसको जानकर परमपद को लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है ।।
गायत्री की दस भुजाऐं जीवन के दश शूलों, कष्ट- दुखों को निवारण करने बाली महाशक्तियाँ हैं ।। जिसके सिर पर माता की दस भुजाओं का वरदान है वह सब प्रकार के दुःखों से निश्चय हो बच सकता है ।।

इस पुस्तक में गायत्री के पाँच मुखों और दस भुजाओं का रहस्य "गायत्री मंजरी" के आधार पर समझाते हुए इस महाविद्या के तत्त्वज्ञान पर प्रकाश डालने का प्रयत्न किया गया है ।। इसके साथ ही समुचित अनुभव होने के कारण पुस्तक की उपयोगिता पर हमें सहज ही विश्वास है ।।

Table of content

1. गायत्री के पाँच मुख
2. अनन्त आनन्द की साधना
3. गायत्री मंजरी
4. अन्नमय कोश और उसकी साधना
5. प्राणमय कोश की साधना
6. विज्ञानमय कोश की साधना
7. आनन्दमय कोश की साधना
8. पञ्चकोशी साधना का ज्ञातव्य
9. पञ्चमुखी साधना का उददेश्य
10. गायत्री साधना निष्फल नहीं जाती ?
11. गायत्री का तन्त्रोक्त वाम मार्ग
12. गायत्री की गुरुदीक्षा शिक्षा

Author Pt. Shriram Sharma Aacharya
Publication Yug Nirman Yojana Vistar trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojana Press, Mathura
Page Length 246
Dimensions 12 X 18
  • 08:58:PM
  • 5 Jun 2020




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