गायत्री चित्रावली

Author: Pt. Shriram Sharma Aacharya

Web ID: 1158

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Preface

गायत्री की महिमा अपार है । वह भूलोक की कामधेनु है । संसार का कोई कष्ट ऐसा नहीं जो माता की कृपा से न कट सके और विश्व की कोई वस्तु ऐसी नहीं जो माता के अनुग्रह से प्राप्त न हो सके । हमने पिछले २४ वर्षो से लगभग २००० आर्य धर्म-ग्रंथों का अन्वेषण किया है और यह पाया है कि गायत्री से बड़ी शक्ति साधन क्षेत्र में दूसरी और नहीं है । यही चारों वेदों की माता है । भारतीय संस्कृति के समस्त ज्ञान-विज्ञान की यही आधारशिला है । इस ज्ञान-गंगा में स्नान करने वाली आत्मा के समस्त पाप कट जाते हैं ।

हमने चौबीस-चौबीस लक्ष के अब तक चौबीस पुरश्चरण किए हैं । इस तपश्चर्या के जो व्यक्तिगत अनुभव हुए हैं, उनसे हमारी यह अटूट मान्यता हो गई है कि सांसारिक समस्त संपत्तियों की अपेक्षा गायत्री उपासना अधिक मूल्यवान है । इसी प्रकार जिन लोगों ने हमारे संरक्षण सहयोग एवं परामर्श से माता की आराधना की है उनके परिणामों को देखते हुए भी हमें दृढ़ विश्वास है कि कभी किसी की गायत्री साधना निष्फल नहीं जाती । इस युग में इससे अधिक फलदायक, सरल, स्वल्प-श्रम-साध्य एवं हानि रहित साधना दूसरी नहीं है ।

Table of content

1. गायत्री महामंत्र
2. आध्यात्मिक माता-पिता
3. पंचमुखी- दसभुजी महाशक्ति
4. ब्रह्माणि
5. परम पोषक वैष्णवी
6. शांभवी दिव्य शक्ति
7. उद्धारकर्त्री माता
8. सद्गुरु की प्राप्ति
9. अनिष्टों का निष्कान
10. सद्गुणों का वरदान
11. उन्नति के पथ पर
12. बंधन से मुक्ति
13. प्रारब्ध परिवर्तन
14. ऋद्धि-सिद्धियों के प्रलोभन
15. काया कष्टों से निवृत्ति
16. सद्बुद्धिदायिनी सरस्वती
17. ऐश्वर्यवर्धिनी लक्ष्मी
18. महाशत्रुओं से संरक्षण
19. अदृश्य सहायता
20. संतुष्ट दाम्पत्य जीवन
21. सुसन्तति का सौभाग्य
22. पारिवारिक सुख शांति
23. परम प्रिय पुत्रियाँ
24. सद्गति और जीवन मुक्ति

Author Pt. Shriram Sharma Aacharya
Publication Yug Nirman Yojana Vistar trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojana Press, Mathura
Page Length 48
Dimensions 12 X 18
  • 10:13:PM
  • 5 Jun 2020




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