गायत्री चालीसा चित्रावली

Author: Pt. Shriram Sharma Aacharya

Web ID: 1155

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Preface

श्री गायत्री दिव्य शक्तियों की जननी है उनमें कितनी शक्तियाँ समाई हुई हैं, आज के समय में तो कोई विरला ही माई का लाल जानता होगा । प्राचीन ऋषि-मुनियों ने अपने- अपने साधनात्मक अनुभव के आधार पर उनकी महिमा का गान किया है । उसी महिमा का जनसाधारण को बोध कराने के लिए परम पूज्य गुरुदेव पं० श्रीराम शर्मा आचार्य ने गायत्री चालीसा की रचना की है । इस गायत्री चालीसा का नियमित पाठ करने से श्री गायत्री की शक्तियों का ज्ञान होता है । औषधि का गुण- धर्म जानने के पश्चात ही उसका लाभ उठाया जा सकता है । उसी प्रकार भगवती गायत्री की शक्तियों से लाभान्वित होने के लिए उनकी शक्तियों का महत्त्व समझना चाहिए । इसी आधार पर इस सचित्र गायत्री चालीसा की रचना की गई है । इसके नित्य पाठ से श्री गायत्री की मर्यादा, प्रकृति और शक्तियों की जानकारी मिलेगी । समुद्र मंथन में मात्र १४ रत्न निकले थे किंतु इस गायत्री मंत्र में २४ रत्न भरे पड़े हैं । उनका उपयोग करके अपने को श्रेष्ठ बनाना मनुष्य के अपने वश की बात है । अस्तु गायत्री उपासना का यह प्रथम चरण है ।

श्री गायत्री चालीसा का पाठ करने से हमारी यह धारणा दृढ़ होती है कि गायत्री देवमाता, वेदमाता एवं विश्वमाता है । इस धारणा से हमारी श्रद्धा, भक्ति तथा निष्ठा को बड़ा बल मिलता है । जिसको पारसमणि के महत्तव का ज्ञान होता है, वही उसे प्राप्त करने का प्रयास करता है तथा उसका उपयोग करके लाभान्वित होता है । तो आइए! हम सब भी गायत्री चालीसा का पाठ करें । उसमें वर्णित महिमा का गान करें, चित्रों में उसका स्वरूप देखते हुए माता गायत्री का कृपा प्रसाद ग्रहण करें ।

Table of content

1. श्री गायत्री चालीसा पाठ की महिमा
2. श्री गायत्री चालीसा

Author Pt. Shriram Sharma Aacharya
Publication Yug Nirman Yojana Vistar trust, Mathura
Publisher Yug Nirman Yojana Press, Mathura
Page Length 48
Dimensions 12 X 18
  • 05:00:PM
  • 9 Aug 2020




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